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डेढ़ महीने बाद भी रेवेन्यू विभाग को पता नहीं बांध किसने हटाया

3 वर्ष पहले
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गांव बहरामपुर जिमींदारा के पास जमीन मालिक द्वारा 26 मार्च को रातो रात नहरी विभाग द्वारा बुधकी नदी का 500 फुट लंबा बांध गायब कर दिया गया था। इस मामले के करीब डेढ़ माह बाद भी रेवेन्यू विभाग यह नहीं पता कर पाया कि जमीन किसकी है। इससे यह साबित होता है कि रेवन्यूविभाग उक्त जमींदार को बचाने की कोशिश कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ जंगलात विभाग की ओर से बांध पर लगाए अलग-अलग किस्मों के 200 पेड़ों को हटाने संबंध में जमीन मालिक पूर्व डीजीपी के भाई के खिलाफ अदालत में 200 पौधों को नुकसान व बांध तोड़ने के मामले में केस लगाया है। रेंज अधिकारी चमकौर साहिब के द्वारा मौके पर तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर 2 अप्रैल को डीएफओ की ओर से अदालत में केस लगाने की मंजूरी दी गई थी। हालांकि अदालत में जंगलात विभाग को यह बात साबित करनी होगी। अब यहां पर सवाल यह है कि जब जंगलात विभाग मालिक का नाम पता लगा सकता है तो रेवेन्यू विभाग क्यों नहीं? वहीं यह काम अगर किसी रसूखदार आदमी की जगह आम आदमी ने किया होता तो यह कार्रवाई कुछ घंटों में ही हो जाती।

बता दें कि ड्रेन विभाग ने एक रसूखदार जमीन मालिक के खिलाफ कार्रवाई के लिए थाना सिंघ भगवंतपुरा में अर्जी दी थी जबकि पुलिस इस मामले में रेवेन्यू विभाग की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इसमें पुलिस को बताया जाएगा कि इस जमीन का मालिक कौन है। इसके बाद पुलिस उस पर कार्रवाई करेगी लेकिन डेढ़ माह बाद भी इस मामले में कुछ नहीं हो सका। बता दें कि जमीन मालिक द्वारा लगाया गया बांध 500 फीट लंबा, 5.50 फीट ऊंचा तथा 9 फीट चौड़ा था। यह बांध जीनियस स्कूल तक बना हुआ था जबकि इस बांध की कुल लंबाई 2500 फीट के करीब थी और यह कुल 17 कनाल 7 मरले नहरी विभाग की जमीन में फैला हुआ था।

बरसात में बाढ़ का खतरा देखते हुए बहरामपुर जिमींदारां के लोग दे चुके हैं मांग पत्र

इस मामले में पहले गांव बहरामपुर जिमींदारा की पंचायत ने सरपंच हरमिंदर सिंह के नेतृत्व में डीसी गुरनीत तेज को मांगपत्र देकर बांध हटाने वाले भू माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। डीसी ने पंचायत को बांध हटाने वालों के खिालफ कार्रवाई करने का भरोसा दिया। इसके बाद नहरी विभाग के एसडीओ प्रथम गंभीर के बयानों पर थाना सिंघ भगवंतपुरा पुलिस ने अज्ञात जमीन मालिकों के खिलाफ आईपीसी की धारा 431 व डैमेज टू पब्लिक प्रापर्टी को नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज किया था लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। बता दें कि यह बांध इसलिए लगाया गया था, क्योंकि 1988 और 93 में बुधकी नदी में पानी का बहाव ज्यादा होने के कारण गांव बहरामपुर जिमींदारा तक पहुंच गया था। अब आने वाली बरसात में भी यही खतरा पैदा हो गया है। बांध टूटने से पैदा हुए इस खतरे से गांव बहारमपुर जिमींदारा, असमानपुरा, सिंघ भगवंतपुर, रंगीलपुर, पथरेड़ी जट्टा आदि के लोगों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। आने वाले बरसात के मौसम के चलते लोगों के मनों में डर है कि कहीं फिर से दोबारा 1993 या 1988 वाला हाल न हो जाए।

जमीन के 200 मालिक, देंगे रिपोर्ट

हमने एक बार सारे मामले की रिपोर्ट बनाकर पुलिस को भेजी थी लेकिन अब पुलिस ने दोबारा रिपोर्ट मांगी है और उसमें हर कब्जादारक का नाम बताने को कहा है। उक्त जमीन की मलकीयत में 150 से 200 मालिक सांझे खाते में हैं। मैंने पटवारी को बुलाया है तथा जल्द ही इसकी रिपोर्ट बनाकर पुलिस को भेजी जाएगी। -राजपाल सिंह सेखों, तहसीलदार

इधर, जंगलात विभाग ने बायनेम कर डाला केस

बहरामपुर जमींदारां में रसूखदार ने यहां से 500 मीटर बुधकी बांध हटा दिया है।

नए बांध के खर्च का एस्टीमेट डीसी को भेजा : एक्सईएन

ड्रेन विभाग की तरफ से मैंने पुलिस को लिखित शिकायत दी थी। अब कार्रवाई तो पुलिस ने करनी है। बाकी बांध को दोबारा बनाने पर आने वाला 1 लाख 30 हजार रुपए के खर्च का एस्टीमेट बनाकर डीसी गुरनीत कौर को भेज दिया गया है। उम्मीद है कि विभाग जल्द ही बांध बनाने के लिए ग्रांट जारी कर देगा। ग्रांट के जारी होते ही दोबारा बांध बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। -सुखविंदर सिंह कलसी, एक्सईएन ड्रेन विभाग

लाखों की जमीन करोड़ों की बनाने को बांध हटाया

बता दें कि जमीन मालिक ने बांध को इसलिए हटाया ताकि उसकी लाखों की जमीन करोड़ों रुपए की हो जाए क्योंकि बांध हटाने के बाद ये जमीन नेशनल हाईवे के उपर आने से इस जमीन की कीमत रातोंरात करोड़ों में पहुंच गई। अब शिकायत के बाद प्रशासन भी हरकत में आ गया है और संबंधित विभागों के अधिकारी जायजा ले रहे हैं। जैसे ही जमीन को समतल करने की सूचना आला विभाग के अधिकारियों को पता चली तो वे भी घटना स्थल पर जाकर जायजा लेकर जमीन मालिक के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।

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