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धर्म... राम कथा : जीवन में बटोरना सरल होता है लेकिन बांटना बहुत कठिन : मनावत

3 वर्ष पहले
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राम कथा श्रवण करने सोमवार को सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

रोशनी | जीवन में बटोरना सरल होता है लेकिन बांटना बहुत कठिन। कुछ माह बाद भोपाल में चुनाव के लिए टिकट बंटेंगे। तब देखना कितने कांच टूटते हैं। बांटने में किसी को ज्यादा, किसी को कम मिले तो आप क्या निर्णय करेंगे। देश इन दिनों बेमतलब के आंदोलनों व दंगों से जूझ रहा है। कुछ स्वार्थी व उपद्रवी लोग अाग लगाकर राष्ट्र की बेइज्जती कर रहे हैं। सरकार को संविधान की हद में रहकर व्यवस्था ठीक करना चाहिए। धरती भी एक दाना लेती है तो 100 दाने वापस करती है। जीवन में जिससे भी लो उसे उसका 100 गुना वापस करो। हवन में शुद्ध घी के साथ जौ व तिल डाला जाता है। अग्नि में घी डालने से दो टन आक्सीजन पैदा होती है। रोशनी में चल रही रामकथा के तीसरे दिन सोमवार को पं. श्याम स्वरूप मनावत ने श्रोताओं को यह सीख दी। उन्होंने देश की राजनीतिक, धार्मिक, आर्थिक व पर्यावरणीय स्थिति पर रोचक अंदाज में श्रोताओं को जाग्रत किया।

ज्ञान, भक्ति के साथ कर्म जरूरी - पं. मनावत ने कहा जीवन में ज्ञान, कर्म और भक्ति जरूरी है। इनके बगैर जीवन बेकार है। महाराज दशरथ की तीन प|ियां थीं। कौशल्या, सुमित्रा व कैकई। कौशल्या ज्ञान, सुमित्रा भक्ति व कैकई को कर्म रूपी माना गया है। भगवान कृष्ण के भी तीन मित्र उद्धव, अर्जुन व सुदामा थे। उद्धव के जीवन में भक्ति नहीं थी, अर्जुन के पास ज्ञान नहीं था और सुदामा ने अपना कर्म नहीं किया। भगवान ने तीनों को रास्ता बताते हुए जीवन की त्रिकोण मिति को पूरा किया। जब तक आपके कर्म नहीं सुधरेंगे राम राज नहीं आ सकता।

पं. श्याम स्वरूप

प्रवचन में यह भी कहा

कारगिल के समय देश का भाव और भक्ति तूफान पर थी, जो आज विलुप्त हो गई है।

जब आंखों में आंसू हों तो सांसारिक लोगों के सामने मत जाना, भगवान के सामने आंसू बहाना। किसी परिचित के पास चले गए और दुखड़ा सुनाया तो आपके लौटते ही वह आपका मजाक बनाएगा।

महिला श्रोताओं से कहा जब बेटी को ससुराल भेजो तो सुमित्रा बनाकर भेजना। सुमित्रा बनने के लिए समर्पण और त्याग जरूरी है। कौशल्या और कैकई तो किस्मत से बन सकते हैं।

इनो से ज्यादा खतरनाक ईगो होता है। इनो कुछ मिनट पेट में हलचल मचाता है लेकिन अहंकार तीन सेकंड में जिंदगी तबाह कर सकता है।

देश के किसानों का दुर्भाग्य है कि उन्हें उनकी फसल का उचित भाव आज तक नहीं मिल पाया। मैं भी किसान का बेटा हूं। देश में किसान का सम्मान होना चाहिए।

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