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जब ज्ञान गुण में बदलता है तो शृंगार बन जाता है, नहीं बदले तो अहंकार होता है
जब ज्ञान गुण में बदल जाता है तो वह जीवन का शृंगार बन जाता है। यदि गुण में नहीं बदले तो यह अहंकार बन जाता है। जीवन का भार बन जाता है। रावण को गुण का घमंड था जो उसका अहंकार बना। जबकि हनुमानजी के गुण उनके अलंकार बने। तभी तो तुलसीदासजी ने लिखा है- जय हनुमान ज्ञान गुण सागर...।
रोशनी में वनवासी कल्याण परिषद द्वारा आयोजित रामकथा के दूसरे पं. श्याम स्वरूप मनावत ने यह उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा ईश्वर प्रेम के वशीभूत ही प्रगट होते हैं। मूर्ति सोने की हो या पत्थर की। पूजा में भाव प्रेम का होना चाहिए। जब कैकई और मंथरा प्रेम को बिगाड़ देती है तो राम अयोध्या छोड़कर चले जाते हैं। यह समाज के लिए संदेश है। समाज व परिवार में जब प्रेम खत्म हो जाता है तो बिखराव होने लगता है। आपस में प्रेम की स्थापना ही राम राज्य की स्थापना है। पंडितजी ने कहा जिनके घर महाराज दशरथ और गांव अयोध्या जैसा हो उन्हें कभी धनुष नहीं उठाना चाहिए। अगर उठा लिया तो शिकार कोई अपना ही होगा। जैसे श्रवण कुमार व पवन कुमार हो गए।
पं. श्याम स्वरूप
वनवासी कल्याण परिषद द्वारा आयोजित रामकथा श्रवण के लिए आसपास के गांवों से सैकड़ों श्रद्धालु रोशनी पहुंच रहे हैं।
भंडारे के साथ कथा का समापन
धनगांव | गांव के दुर्गा माता मंदिर में चल रही भागवत कथा का रविवार को समापन हो गया। पं. पंकज शर्मा ने श्रोताओं को गीता का ज्ञान रोचक ढंग से कराया। संगीतमय भजनों से श्रोताओं को भाव विभोर किया। उन्होंने अंतिम दिन श्रोताओं से कहा अपनी कन्याओं के लिए वर देखते समय योग्यता देखें। क्योंकि अयोग्य करोड़पति भी रोडपति बन जाते हैं। कथा समिति के भागीरथ डाक्से, मिश्रीलाल डाक्से, देवाजी, हुकुम डाक्से, संतोष डाक्से ने बताया कथा की पूर्णाहुति के बाद कन्या भोज व भंडारे का आयोजन किया गया।
धनगांव के दुर्गा माता मंिदर में चल रही भागवत कथा के दौरान प्रसादी ग्रहण करते हुए।