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बिना जांच किए प्रकरणों को वापस लेने और तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग

3 वर्ष पहले
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ग्रामीणों ने पूर्व तहसीलदार मटोलीराम शर्मा व धीरज शुक्ला एडवोकेट के नेतृत्व में रैली निकाल कर नारेबाजी करते हुए बिना जांच प्रकरणों को वापिस लेने की मांग की। उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम परशराम मीणा को ज्ञापन सौपा।

अधिवक्ता धीरज शुक्ला ने बताया कि शिकायतकर्ता गांव सिरसौंदा निवासी एक व्यक्ति ने 27 फरवरी 2012 को कस्बे के वारिसानों की ओर से बिना हस्ताक्षरित एक प्रार्थना पत्र सूची सहित जिला कलेक्टर को अवैध खातेदारी के विरूद्ध बिना जांच पेश करने के संबंध में प्रस्तुत किया। वही शिकायतकर्ता ने विभागीय जांच नहीं कराकर नाजायज तरीके से तथ्यों को छिपाते हुए तहसीलदार की मिलीभगत से घर बैठे ही बिना जांच किए प्रकरणों को एडीएम के समक्ष पेश कर दिया हैं।

जिससे कस्बे के करीब पंद्रह सौ किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच कर परेशान होकर भरतपुर में वकीलों के चक्कर लगा रहे हैं। इसके बाद एसडीएम परशराम मीणा को पूर्व तहसीलदार मटोलीराम शर्मा ने राजस्व के नियमों का हवाला देकर शिकायती प्रार्थना पत्र की जांच कराने, जमाबंदी से रेफरेंस का अंकन बंद करने व राजस्व के कर्मचारियों से मामले की जांच कराने की मांग की।

ग्रामीणों ने रेफरेंस को वापिस नहीं लेने एवं समस्याओं का 25 मई तक निराकरण नहीं होने पर उपखंड कार्यालय के बाहर धरना देने की चेतावनी दी है। जिसके लिए सम्बन्धित अधिकारी जिम्मेदार होने की बात कही। समस्या का निदान जल्द कराए जाने की पर सभी ने जोर दिया।

अन्यथा धरना प्रदर्शन िकया जाएगा। इस मौके पर पवन, प्रेमशंकर, श्याम सोनी, सत्तू गौड़, राजेश गाेयल, विनय प्रभाकर, अभिषेक कटारा, तुलाराम आदि उपस्थित थे।

रूपवास. एसडीएम को ज्ञापन सौपते ग्रामीण

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