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हाईकोर्ट ने नदी-नालों में अतिक्रमण की स्थिति का ब्यौरा मांगा

3 वर्ष पहले
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लीगल रिपोर्टर. जयपुर | हाईकोर्ट ने रामगढ़ बांध सहित प्रदेश के अन्य जलस्रोतों के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण मामले में भरतपुर जिला कलेक्टर और यूआईटी सचिव को शपथ पत्र सहित यह बताने के लिए कहा है कि जिले में नदी-नालों में अतिक्रमण की क्या स्थिति है।

वहीं अदालत ने नदी-नालों के डूब क्षेत्र की भूमि का आवंटन और नियमन नहीं करने का निर्देश दिया है। न्यायाधीश एम.एन.भंडारी व डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह अंतरिम निर्देश रामगढ़ बांध सहित प्रदेश के जलस्रोतों के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण मामले में गुरुवार को दिया। अदालत ने सरकार से पूछा है कि पाली और बालोतरा के लिए 2007 में दिए आदेशों की पालना में उन्होंने क्या कार्रवाई की और अब वहां पर प्रदूषण के क्या हालात हैं।

अदालत ने मामले की सुनवाई 5 जुलाई को तय की है। सुनवाई के दौरान भरतपुर कलक्टर और यूआईटी सचिव सहित प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी पेश हुए। महाधिवक्ता ने पाली और बालोतरा के एसटीपी प्लांट की रिपोर्ट पेश करने के लिए समय मांगा। जिस पर अदालत ने प्रदूषण बोर्ड के अफसरों से कहा कि वर्ष 2007 के अदालती आदेश की पालना हो जाती तो वहां के हालात खराब नहीं होते। ऐसे में इसके जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

सुनवाई के दौरान मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेन्द्र डांगी और अशोक भार्गव ने पांच विभागों की ओर से पिछली सुनवाई पर दिए गए शपथ पत्रों का जवाब पेश किया।

कमेटी ने कहा कि विभागों के शपथ पत्र एक दूसरे से विरोधाभासी हैं। अदालत ने सभी पक्षों को सुनकर राज्य सरकार से नदी-नालों में अतिक्रमण का ब्यौरा देने के लिए कहा।

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