हो सकता है सफलता आपके पीछे ही हो!
बुधवार को कोलकाता से मुंबई लौटते हुए मेरे पास की सीट में बैठे युवक को चालक दल के सदस्य ने हवाई जहाज के उड़ान भरने के बाद भी फोन पर बात करने के लिए फटकारा। उसने अनिच्छा से फोन पर बतियाना बंद किया पर मोबाइल फोन स्विच ऑफ नहीं किया और न एरोप्लेन मोड में रखा, जो अनिवार्य है। बल्कि मेरी तरफ देखकर बड़बड़ाने लगा, ‘बिज़नेस की प्राथमिकताओं और मुनाफे के लिए किसी भी चीज को तेजी से अमल में लाने की आवश्यकता को चालक दल के ये अशिक्षित सदस्य कब समझेंगे।’ यही कारण है कि ये वायुसेवा कंपनियां हमेशा घाटे में रहती हैं।’
मैंने तो उसकी ओर देखा भी नहीं, क्योंकि चालक दल की वह सदस्य मुझे परिपक्व और शिक्षित महिला लगीं। इसलिए मैं बहरा हो गया, क्योंकि हवाई जहाज के सुरक्षा नियमों को मानने से इनकार करने वाले किसी व्यक्ति की बातों पर ध्यान देने में कोई बुद्धिमानी नहीं है। इसलिए मैंने अपनी आंखें बंद कर ली और उस 2:45 घंटे लंबी उडा़न में सो गया। हालांकि, अंदर से मुझे लग रहा था कि मुझे उसे सबक सिखाने का कोई मौका खोजना चाहिए। जब होस्टेस सुबह का नाश्ता लेकर लौटीं तो मैंने उनसे पूछा कि वे किस शहर की हैं और जब उन्होंने कहा कि वे मुंबई की हैं तो मैंने पूछा कि वे किस कॉलेज में पढ़ी हैं तो उनके जवाब ने मुझे चकित कर दिया। वे पोस्ट ग्रेजुएट थीं और कंज्युमर बिहेवियर पर डॉक्टरेट कर रही थी। मैंने ऊंची आवाज में उन्हें बधाई दी ताकि मेरा पड़ोसी भी सुन ले। अब बहरा बनने की उसकी बारी थी। नाश्ते के बाद मैं सो गया। विमान लैंड होने के पहले ही मेरे स्मार्ट पड़ोसी यात्री ने कैब बुक करने के लिए टेक्स्टिंग शुरू कर दी और अतत: उसे तत्काल 25 मिनट के वेटिंग टाइम सहित कन्फर्मेशन मिल गया। इतना ही वक्त उसे टैक्सी स्टैंड तक पहुंचने में लगने वाला था। बिना एक मिनट गंवाए, सफलतापूर्वक टैक्सी बुक करने पर वह मेरी ओर देखकर मुस्कराया।
जो मुंबई रनवे को नहीं जानते उन्हें बता दूं कि विमान मुंबई के पूर्वी क्षेत्र सहार पर उतरता है और वह पश्चिमी हिस्से सांता क्रूज में हवाई पट्टी के खत्म होने तक दौड़ता रहता है और फिर यू टर्न लेकर सहार लौटता है, जहां यात्री टी-2 एयरपोर्ट पर उतरते हैं। विमान को कम से कम दस मिनट लगते हैं, क्योंकि सांता क्रूज और सहार के बीच 8 किलोमीटर की दूरी है। विमान रुकने के पहले ही वह खड़ा हो गया, अपना सूटकेस निकाला, उसके लिए चालक दल के गुस्से का शिकार बना, फिर भी बाहर निकलने के लिए दौड़ा। लोगों ने उसे आगे जाने दिया, क्योंकि वे उससे पिंड छुड़ाना चाहते थे।
उसके जाने के तीस मिनट बाद मैंने अपना सामान लेने के बाद आहिस्ते से विमानतल छोड़ा और देखा कि वही यात्री पार्किंग में अब भी इंतजार कर रहा है और टैक्सी ड्राइवर पर वक्त पर न आने के लिए चीख रहा था। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि जब उसने कैब बुक की तो कैब ड्राइवर को अपने स्मार्ट फोन पर सांता क्रूज की लोकशन नज़र आई (क्योंकि तब विमान सांता क्रूज पर यू टर्न ले रहा था), जबकि यात्री सहार के टी2 एयरपोर्ट पर उतरा।
उसने मुझे कोलकाता से उड़ान भरते वक्त चालक दल की घोषणा की याद दिलाई कि बाहर जाने का आपातकालीन द्वार आपके पीछे हो सकता है। उन्होंने अपने हाथों के इशारे से आपात द्वार दिखाते हुए कहा था, जरूरी नहीं कि यह आपके आगे ही हो।
फंडा यह है कि  पास मौजूद भावी सफलता को पहचानें। संभव है वह आपके पीछे हो! सफलता का पीछा करने में जल्दबाजी न दिखाएं।
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एन. रघुरामन
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