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राहुल गांधी ब्राह्मण हैं या नहीं, ये सवाल किसने उठाया, हमारी पार्टी ने तो नहीं उठाया- अमित शाह

3 वर्ष पहले
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सवाल: यूपी में इस बार अगर बीएसपी और एसपी साथ जाते हैं तो आपके लिए बहुत मुश्किल हो सकती है।

जवाब : हमारे पास अभी एक साल है। हम 50 प्रतिशत की लड़ाई के लिए टीम को तैयार कर रहे हैं। इस बार भी दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर ही जाएगा।

सवाल: आप यूपी, राजस्थान, मप्र, छत्तीसगढ़ और गुजरात जैसे राज्यों में बहुत अच्छे नंबरों के साथ हैं। माना जा रहा है कि इन राज्यों में आपकी सीटें कम होंगी...भरपाई कहां से करेंगे?

जवाब : देश में 200 सीटें ऐसी हैं जो बीजेपी ने नहीं जीती हैं। वहीं से भरपाई करेंगे।

सवाल: यानी जो सीटें पहले नहीं जीतीं वहां काम कर रहे हैं?

जवाब : कर ही रहे हैं भैया। 27 मई 2014 से ही काम कर रहे हैं। असम जीत गए, मणिपुर जीत गए, त्रिपुरा जीत गए, बंगाल में नंबर दो हो गए, उड़ीसा में नंबर दो हो गए।

सवाल: गुजरात चुनाव के बाद ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस उठ खड़ी हुई है। राहुल कमबैक कर रहे हैं। कांग्रेस भी पहले से बेहतर हुई है। क्या आपको भी ऐसा लग रहा है?

जवाब : परिणामों को देखते हुए तो ऐसा नहीं लगता है। चुनाव में तो परिणाम देखे जाते हैं।

सवाल: लेकिन धारणा बन रही है कि राहुल पहले से ज्यादा आक्रामक हो गए हैं। मोदीजी को चुनौती दे रहे हैं कि मुझे 15 मिनट बोलने का मौका दीजिए। यानी पार्टी और राहुल दोनों ही आत्मविश्वास से भरे हुए दिखाई दे रहे हैं।

जवाब : देखिए, आत्मविश्वास का आधार जनादेश होना चाहिए। आत्मविश्वास का आधार मीडिया में क्या चल रहा है यह नहीं होना चाहिए। यानी मीडिया के आधार पर आत्मविश्वास नहीं बढ़ना चाहिए।

सवाल: पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस भी सॉफ्ट हिंदुत्व की बात करने लगी है। उसकी मुस्लिम परस्त छवि बदल रही है। क्या आपको लगता है कि ऐसे में बीजेपी की जो यूएसपी थी वो खत्म हो रही है?

जवाब : नहीं, हम तो चाहते हैं कि सभी लोग हमारे रास्ते पर चलें। कांग्रेस भी हमारे रास्ते पर चले, कम्युनिस्ट भी हमारे रास्ते पर चलें। हम ऐसी यूएसपी रखना नहीं चाहते।

सवाल: अमितजी एक तरफ तो हम लोग बहुत आगे जाने की बातें करते हैं... साइंस और टेक्नोलॉजी की बातें करते हैं। दूसरी तरफ चुनाव प्रचार में मुद्दे बनते हैं- अमित शाह जैन हैं या हिंदू ...राहुल ब्राह्मण हैं या नहीं। इसे आप कैसे देखते हैं?

जवाब : ये प्रचार किसने किया? ये दोनों सवाल किसने उठाए? हमने नहीं उठाए। तो सवाल का एड्रेस गलत है आपका। मेरी पार्टी ने नहीं उठाए ये सवाल।

सवाल : नहीं किसी भी पार्टी ने उठाए पर आप...

जवाब : (बीच में काटते हुए) भैया मैंने नहीं उठाए ये सवाल। मैं दूसरों को एडवाइस नहीं कर सकता। हमने कभी ऐसे व्यक्तिगत सवाल नहीं उठाए।

सवाल: इन दिनों न्यायपालिका में जो टकराव चल रहा है उसे आप कैसे देखते हैं?

जवाब : देखिए, कांग्रेस की कमिटेड ज्यूडिशियरी की आदत है, इंदिराजी के जमाने से। पुश्तैनी आदत है और पहली बार जजों की सीनियरिटी को बदलकर चीफ जस्टिस बनाने का काम भी इंदिराजी ने ही किया था। जब उन्होंने संविधान को तोड़ना-मरोड़ना शुरू किया तब केशवानंद भारती का ऐतिहासिक जजमेंट सुप्रीम कोर्ट को देना पड़ा था। मगर विपक्ष में रहकर भी कमिटेड ज्यूडिशियरी के लिए कैसे प्रयास किए जाएं इसका नया नमूना पेश किया है कांग्रेस ने देश की डेमोक्रेसी में।

सवाल: सीजेआई के खिलाफ महाभियोग आता है, पहली बार...

जवाब : (सवाल बीच में काटते हुए..) मैं यही कह रहा हूं...ये सब कांग्रेस के कमिटेड ज्यूडिशियरी के लिए डेसप्रेट एफर्ट हैं।

सवाल: जजों के नाम लौटाए जा रहे हैं?

जवाब : कई सरकारों ने रिटर्न किए हैं। ये चुनी हुई सरकार का संवैधानिक अधिकार है। इंदिराजी के वक्त तो इस्तीफे ही हो गए थे..सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों के।

सवाल: पिछले लोकसभा चुनाव के घोषणा-पत्र में बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने की बात कही थी। लेकिन पार्टी बोलती है कि अब ऐसा कोई इश्यू नहीं है।

जवाब : पार्टी ने नहीं कहा कि ऐसा इश्यू नहीं है। जम्मू-कश्मीर में त्रिशंकु विधानसभा है। वहां सरकार कॉमन मिनिमन प्रोग्राम से चल रही है। जब कोई सरकार इस तरह चलती है तो पार्टियों को अपने कुछ इश्यू एक तरफ रखने पड़ते हैं।

सवाल: गौहत्या एक बड़ा मुद्दा रहा है देश में हमेशा से (बीच में टोकते हुए शाह कहते हैं-गांधीजी के वक्त से ही) इस पर पार्टी का क्या स्टैंड है?

जवाब : क्लीयर ही है,पार्टी का स्टैंड।

सवाल: क्या कोई राष्ट्रीय कानून बनेगा?

जवाब : राज्यों का विषय है। इसमें राष्ट्रीय कानून नहीं बन सकता।

सवाल: ऐसा क्यों लग रहा है कि दलित समाज से जुड़े मुद्दे मोदी सरकार आने के बाद ज्यादा चर्चा में आने लगे हैं?

जवाब : इसके दो कारण हैं। पहला मोदीजी ने दलितों के कल्याण के लिए बहुत सारी योजनाएं चलाई हैं। उज्ज्वला की गैस हम देते हैं तो दलितों को स्वाभाविक रूप से फायदा मिलता है, क्योंकि गरीबी वहां ज्यादा हैं। शौचालय बनाते हैं तो उसका फायदा भी दलितों को सबसे ज्यादा मिलता है। मुद्रा बैंक और स्टैंडअप के लोन तो एक्सक्लूसिव गरीबों के लिए ही हैं। मुद्रा बैंक में प्राथमिकता दलितों को मिलती है। इसके कारण दलित का मुद्दा चर्चा में आया। ये तो पॉजिटिव कारण हैं। दूसरा कारण यह है कि 2014 के बाद कांग्रेस की देश में 11 राज्यों से सरकारें चली गई हैं। इसके कारण डेसप्रेट होकर जातिवादी राजनीति करने के लिए कांग्रेस ने ये सारे प्रयास किए हैं। इन्हीं दो कारणों से दलित चर्चा में हैं। हम आंबेडकरजी का स्मारक बनवाते हैं, उनके लिए विशेष सत्र बुलाते हैं, आंबेडकरजी के नाम पर सिक्का निकालते हैं तो दलित का मुद्दा आता ही है। इस तरह हम ही दलित का मुद्दा सरफेस पर लाए हैं, मुख्य विचार में लाए हैं।

सवाल: तो क्या आपको लगता है कांग्रेस को अपना वोट बैंक अपने से दूर जाते दिख रहा है?

जवाब : कहां कांग्रेस का वोट बैंक था? इस देश में सबसे ज्यादा दलित सांसद बीजेपी के, सबसे ज्यादा दलित विधायक बीजेपी के, सबसे ज्यादा दलित कॉर्पोरेटर बीजेपी के हैं। सबसे ज्यादा जिला पंचायत सदस्य भी बीजेपी के ही हैं। कहां कोर वोट बैंक रहा कांग्रेस का। आप किस जमाने की बात कर रहे हैं?

सवाल: विपक्ष आरोप लगाता है कि नोटबंदी पूरी तरह विफल रही है। रिजर्व बैंक ने भी माना है कि सारे नोट वापस आ गए हैं।

जवाब : देखिए नोटबंदी को इस तरह नहीं देखा जा सकता। नोटबंदी की सबसे बड़ी सफलता है, जो विपक्ष कहता है कि सारा पैसा वापस आ गया तो ...जो सारा पैसा अब तक धन्ना सेठों, भ्रष्ट अफसरों और भ्रष्ट नेताओं के घर पर पड़ा था वो अब बैंक में पंहुच गया है। बैंक में जिन्होंने भरा है उन्हें जवाब देना पड़ रहा है कि इसका टैक्स दिया या नहीं। पेनल्टी भी भरनी पड़ रही है। अब तक जो पैसा कालाधन के रूप में लोगों के घरों में पड़ा था अब वो देश के विकास में लग रहा है।

सवाल: मनमोहन सिंह गंभीर आरोप लगा रहे हैं कि मोदी सरकार आने के बाद आम जनता का बैंकिंग सिस्टस से भरोसा उठता जा रहा है।

जवाब : अभी तो मनमोहन सिंह पर से जनता का विश्वास उठ गया है, इसलिए विपक्ष में बैठे हैं वो। बैंकिंग सिस्टम की बात न करें वो।

सवाल: क्या देश की राजनीति सिर्फ इसी मुद्दे पर चल रही है कि मोदीजी को कैसे रोका जाए?

जवाब : नहीं ऐसा नहीं है। हम सत्ता में हैं और बाकी लोग सत्ता में आने का प्रयास कर रहे हैं..तो संघर्ष हमारे साथ ही होगा।

सवाल: लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ में करवाए जाने की सोच रहे हैं आप लोग?

जवाब : ऐसा नहीं है। प्रधानमंत्रीजी ने एक विचार रखा है देश के सामने। जिस पर सार्वजनिक बहस हो रही है। इस पर कानून बनेगा जब सभी दलों का समर्थन होगा, चुनाव आयोग भी सुनेगा तब जाकर बात बनेगी। इसके लिए जनप्रतिनिधित्व कानून में बदलाव करना होगा। ये संसद में होता है, कोई गोपनीय तरीके से नहीं हो सकता।

सवाल: अगला सवाल जो मैं करने जा रहा हूं उसके कोई सीधे-सीधे तथ्य नहीं हैं मेरे पास और आप धारणाओं को मानते नहीं हैं, लेकिन एक बात बहुत चर्चा में है कि ...आप जवाब देना पसंद न करें तो कोई बात नहीं... विपक्ष को, मीडिया को और ज्यूडिशियरी को बहुत सप्रेस किया जा रहा है।

जवाब : इसमें कोई तथ्य नहीं है। कांग्रेस का दुष्प्रचार है।





विपक्ष में रहकर भी कमिटेड ज्यूडिशियरी के लिए कैसे प्रयास किए जाएं इसका नया नमूना पेश किया है कांग्रेस ने

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