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खुला अखाड़ा...गुरदास मान ने जब गाया ‘रोटी हक दी खाइये, भावें बूट-पालिशां करिए’ तो झूमे दर्शक
सादुलशहर| राजस्थान में जितनी गहराई पर पानी है उतने ही यहां के लोग दिल के साफ-सुथरे, गहरे विचारों एवं धार्मिक प्रवृत्ति के हैं। यह बात रविवार को एक कार्यक्रम में गुरदास मान ने कही। उन्होंने वीरों की भूमि को नमन करते हुए कहा कि जितनी गाथाएं राजस्थान की हैं, उतनी और कहीं की नहीं हैं। बस युवा वर्ग नशे की प्रवृत्ति से दूर रहें और अपने भविष्य के प्रति सचेत रहें। सबसे पहले गुरदास मान ने गणेश वंदना के साथ एक से बढक़र एक प्रस्तुतियां दी। की बनू दुनिया दा.., सज्जना वे सज्जना.., रोटी हक दी खाइये भावे बूट-पालशां करिए, छल्ला.. आदि प्रस्तुति देकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।