- Hindi News
- National
- पटवार संघ जिलाध्यक्ष दिनेश यादव एक लाख की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार
पटवार संघ जिलाध्यक्ष दिनेश यादव एक लाख की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार
भास्कर संवाददाता, श्रीगंगानगर।
राजस्थान पटवार संघ के जिलाध्यक्ष दिनेश यादव पुत्र देवी प्रसाद निवासी लखूवाली हैड हनुमानगढ़ को एसीबी ने एक लाख रुपए की रिश्वत की मांग के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई सोमवार दोपहर को सादुलशहर कस्बे में की गई। आरोपी पटवारी को मंगलवार को एसीबी मामलों की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। एसीबी श्रीगंगानगर चौकी प्रभारी एएसपी राजेंद्र डिढारिया ने बताया कि आरोपी पटवारी पर सादुलशहर तहसील के चक 15 केएसडी धिंगतानिया निवासी परिवादी राजेंद्र कुमार जाट ने जुलाई 2016 में शिकायत की थी। इसमें बताया था कि परिवादी के दादा सुरजाराम के नाम चक 15 केएसडी में कुल 37 बीघा नहरी जमीन में 28 बीघा जमीन का परिवादी के पिता भागीरथ व भाइयों के नाम अलग-अलग इंतकाल दर्ज कर बंटवारे की नकल जारी करनी थी। इसकी एवज में आरोपी पटवारी ने एक लाख 20 हजार रुपए रिश्वत की मांग की। आरोपी पटवारी ने तब दरियादिली दिखाते हुए 20 हजार की रियायत कर एक लाख रुपए में सौदा तय कर लिया। आरोपी ने परिवादी से सौदा करते ही 75 हजार रुपए लेकर इंतकाल दर्ज कर दिया। इसके बाद एसीबी ने 26 व 27 जुलाई को रिश्वत मांग का सत्यापन किया और शेष रहे 25 हजार में 10 हजार रुपए लेते हुए शिकायत का सत्यापन करवाया गया।
आरोपी पटवारी ने शेष 15 हजार में भी पांच हजार रुपए की छूट कर शेष रकम बाद में काम पूरा होने पर देना तय हुआ। आराेपी को रंगे हाथ गिरफ्तार करने के कई बार प्रयास किए गए लेकिन आरोपी को एसीबी में शिकायत का पता चल जाने से कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी।
इंतकाल दर्ज कर नकल जारी करने के बदले 85 हजार रुपए लेते किया सत्यापन
दोस्त की दुकान पर छुपा था, मुखबिर से पता लगा किया काबू
एएसपी राजेंद्र ढिढारिया ने बताया कि पटवारी दिनेश कुमार यादव के खिलाफ मिली शिकायत का दो बार सत्यापन किया गया लेकिन रंगे हाथ गिरफ्तार नहीं किया जा सका था। अब अभियोजन स्वीकृति मिलने पर सोमवार को आरोपी पटवारी को गिरफ्तार करने के लिए किसान बन फोन कर मिलने का आग्रह किया। इस पर आरोपी पटवारी ने सादुलशहर में नहीं होना बताया। एसीबी ने अपने सूत्रों से पता करवाया तो आरोपी पटवारी तहसील कार्यालय में ही बैठा होने की सूचना मिली। आरोपी को पकड़ने पहुंचे उससे पहले ही वह तहसील कार्यालय से गायब होकर अपने किसी परिचित के पास दुकान में जा छुपा। एसीबी ने मुखबिर से आराेपी का ठिकाना पता कर छापा मारकर गिरफ्तार कर लिया।