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‘धर्म आडंबर नहीं जीने की पद्धति है’

3 वर्ष पहले
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सफीदों | श्री 1008 कैवल्यानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि जो मनुष्य के सोए हुए भाग्य को जगाकर पाप को भगाए वह भागवत है। भागवत कथा जीवन जीने का तरीका सिखाती है। धर्म और सत्य का मार्ग भागवत पढ़ने और सुनने से ही समझ में आता है। इसलिए जहां भागवत का पाठ सुनने का अवसर मिले हमें सुनना चाहिए और साथ ही साथ उस पर मनन भी करना आवश्यक है। वे रविवार को कस्बे की श्री विश्वकर्मा धर्मशाला में 7 दिन से चल रही श्रीमद्‌भागवत कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं को प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि सत्य थोड़ा परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता। इसलिए हमेशा धर्म और सत्य के मार्ग पर ही चलना चाहिए।

एक बार भी कोई सच्चे मन से भागवत कथा सुनता है, उसके हृदय की सभी बुराइयां बाहर निकल जाती हैं। हृदय में प्रेम का संचार होने लगता है।

उन्होंने धर्म के स्वरूप पर चर्चा करते हुए कहा कि धर्म आडम्बर नहीं, जीवन जीने की पद्धति है। यह पद्धति आचरण में उतरे तो ही सार्थक है। इस अवसर पर समिति के प्रधान लाभ सिंह, बीरा सिंह, श्रवण कुमार, पंकज धीमान, रामेश्वर, बलबीर सिंह, संजीव कुमार, निरंजन, सुनील कुमार व नीना मौजूद रहे।

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