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बड़े गांव छोड़कर 2500 की आबादी वाले जयपुर गांव में रात्रि ठहराव पर उठे सवाल

3 वर्ष पहले
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सफीदों. जयुपर गांव में रात्रि ठहराव कार्यक्रम में सुनवाई करते अधिकारी।

भास्कर न्यूज | सफीदों

लोगों को उनके ही गांव में उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए शुरू किए गए अफसरों का गांवों में रात्रि ठहराव औपचारिकता बनता जा रहा है। सफीदों हलके बड़े गांवों को छोड़कर मात्र 25 सौ आबादी वाले गांव जयपुर में रात्रि ठहराव को लेकर कई सवालिया निशान उठने लगे हैं।

गांव जयपुर सफीदों हलके छोटे गांव में गिना जाता है। वहीं इसके आसपास छाप्पर, बहादुरगढ़, सिल्लाखेड़ी, मलार गांव हैं। जिनकी जनसंख्या ढाई हजार से चार हजार तक ही है। इसके अलावा गांव हाट, सिंघाना, मुआना, कालवा, डिडवाड़ा ऐसे गांव हैं जिनकी आबादी दस हजार से लेकर 20 हजार के बीच है। बावजूद इसके जयपुर में अफसरों का रात्रि ठहराव किसी के समझ में नहीं आ रहा है। रात्रि ठहराव में विधायक जसबीर देशवाल व भाजपा के जिलाध्यक्ष अमरपाल राणा तक मौजूद थे। यही नहीं रात्रि ठहराव के दौरान ग्रामीणों द्वारा दी गई शिकायतों पर गांव में मौजूद होने के बावजूद अधिकारियों ने मौके पर जाकर निरीक्षण करना तक मुनासिब नहीं समझा। 3 घंटे में 228 शिकायतें सुनीं गईं लेकिन मौके पर समाधान एक का भी नहीं किया गया।

चयन प्रक्रिया ठीक नहीं

आखिर जयपुर गांव में ही प्रशासन ने रात्रि ठहराव कार्यक्रम आयोजित क्यों किया। प्रशासन की गांव को चयन करने की प्रक्रिया ठीक नहीं थी, नहीं तो इस कार्यक्रम का अधिक लोगों को फायदा मिलता।\\\' -सुरेंद्र राणा, जिला प्रधान, सरपंच एसोसिएशन

अगली बार किसी बड़े गांव में होगा ठहराव : विधायक

छोटे गांवों के वासियों को भी अधिकारियों के इस प्रकार के कार्यक्रम पर पूरा हक होना चाहिए। अब छोटे गांव में रात्रि ठहराव हुआ है, तो अगली बार किसी बड़े गांव मेें अधिकारी इस प्रकार का आयोजन करवा दिया जाएगा।’ -जसबीर देशवाल, विधायक, सफीदों

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