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एक खनिज अधिकारी सब पर भारी, 200 से ज्यादा खदानें, कितनी वैध बताने को तैयार नहीं
शाहगढ़ में कार्रवाई की भनक लगते ही आरके कैथल बीमार, दफ्तर के लोगों ने बताया कि वे भोपाल में एडमिट
भास्कर संवाददाता | सागर
जिले के खनिज अधिकारी आरके कैथल सब पर भारी हैं। यह बात इसी से प्रमाणित होती है कि कलेक्टर के कहने तक पर उन्होंने सभी तहसीलदारों को जिले भर की खदानों की सूची डेढ़ माह में नहीं दी है। इतना ही नहीं, वह तो अब भी यह बताने को तैयार नहीं हैं कि जिले में कितनी खदानें चल रही हैं और उनमें से कितनी ऐसी हैं जो वैध हैं। कितनी ऐसी हैं जो जब स्वीकृत हुईं थीं, तब तो वे सारे नियमों का पालन करती थीं, लेकिन बाद में रिचुअल नहीं होने के कारण अब अवैध हैं? या कितनी नियम विरुद्ध चल रही हैं। मामाल उजागर होने के बाद बुधवार को कैथल बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी पर चले गए। गुरुवार से लेकर शनिवार तक उनके मोबाइल नंबर और वाट्सएप पर तीन मर्तबा मैसेज कर सवाल भेजे गए तो भी उन्होंने जवाब देना उचित नहीं समझा। उधर खनिज विभाग के ही कुछ कर्मचारियों का कहना है कि खनिज अधिकारी की तबीयत उसी दिन से खराब है, जिस दिन शाहगढ़ तहसीलदार ने खदानों का सीमांकन शुरु किया था। यह बात कितनी सही है, इसकी पुष्टि के लिए भी खनिज अधिकारी कैथल ने कॉल रिसीव नहीं किया। अचानक से कैथल की तबीयत शाहगढ़ में कार्रवाई के साथ बिगड़ना महज संयोग है या फिर कुछ और, इसके जवाब भी आना शेष हैं।
मैसेज पर भेजे गए इन सवालों के जवाब से बच रहे कैथल
Á कलेक्टर के कहने के बाद भी आपने खदानों की सूची जिले भर के तहसीलदारों को क्यों नहीं दी?
Á क्या यह माना जाए कि आप नहीं चाहते कि किसी खदान पर कोई कार्रवाई हो? या आप खदान मालिकों को बचा रहे हैं?
Á क्या आप कलेक्टर के आदेश तक का पालन करना जरूरी नहीं समझते?
Á जिले में कुल कितनी खदानें हैं? उनमें से कितनी ऐसी हैं, जो सभी नियमों का पालन करती हैं?