पिछले साल का चना-मसूर रखे रहे किसान, केंद्रों पर खरीदने से इंकार
सरकारी खरीद: इंदौर से आए सर्वेयर जांच रहे क्वालिटी
भास्कर संवाददाता | सागर
पिछले दो माह से समर्थन मूल्य पर चना-मसूर की खरीदी का इंतजार कर रहे ऐसे किसान मायूस हो गए हैं, जो अपने पिछले वर्ष की उपज भी इसी पर बेचने की आस लगाए गए बैठे थे। दरअसल, पिछले साल चना-मसूर के दाम 3 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक के आसपास बने रहने के चलते कई किसानों ने अपनी उपज बेचने के जगह गोदाम या अन्य सुरक्षित जगह रख ली थी।
दो माह पहले जब यह घोषणा हुई कि चना-मसूर समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा तो किसानों ने दो माह और इंतजार करना उचित समझा। पर जैसे ही 12 अप्रैल को खरीदी शुरु हुई और किसान नई उपज के साथ पिछले साल की उपज लेकर पहुंचे मंडियों में पहुंचे तो वहां पुरानी उपज लेने से इंकार कर दिया गया। बताया गया है कि इंदौर से आए सर्वेयर उपज की जांच कर पता लगाते हैं कि यह उपज इसी साल की है या फिर पिछले साल की। मशीनों से जांच कर सबकुछ साफ हो जाता है।
सिर्फ चना-मसूर पर नियम, गेहूं फ्री : समर्थन मूल्य पर एक ओर जहां चना-मसूर की खरीदारी चल रही है, वहीं दूसरी तरफ गेहूं भी खरीदा जा रहा है। गेहूं की खरीदी में ऐसा कोई नियम नहीं है कि पुराना गेहूं नहीं खरीदा जाएगा, उसमें सिर्फ यह देखा जा रहा है कि गेहूं की गुणवत्ता ठीक होना चाहिए। जबकि चना-मसूर में यह भी परखा जा रहा है कि उसमें मॉयश्चर है कि नहीं। पिछले साल की उपज को केंद्रों से लेने से साफ इंकार किया जा रहा है। चना-मसूर की समर्थन मूल्य पर खरीदी में सरकार पेंच पर पेंच लगाए जा रही है।