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साइकिल के लिए बच्चों को 25 किमी दूर भेजने वाले प्राचार्य पर कार्रवाई नहीं, सिर्फ जवाब मांगा

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | सागर

स्कूलों में अध्ययनरत जिन विद्यार्थियों को साइकिलों का वितरण होना है, वह स्कूल परिसर से ही होगा। ब्लॉक मुख्यालय या अन्य किसी भी जगह आने के लिए विद्यार्थियों को बाध्य किया गया तो स्कूल प्राचार्यों के साथ ही बीईओ की भी जवाबदेही तय होगी। यह निर्देश जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी बीईओ को जारी किए हैं।

डीईओ शर्मा ने बताया कि मालथौन ब्लॉक के ललोई हाई स्कूल के विद्यार्थियों को 25 किलोमीटर दूर मालथौन विकासखंड मुख्यालय से साइकिल लाने की मजबूरी की जानकारी दैनिक भास्कर के माध्यम से लगी। यह सरासर गलत है। विद्यार्थी को इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। ऐसे में मैंने सभी बीईओ को निर्देश जारी किए हैं कि वह इस बात की सतत मॉनीटरिंग करें कि स्कूलों में साइकिल वितरण किस तरह से किया जा रहा है। इसके लिए सभी स्कूलों से प्रमाण के तौर पर साइकिल वितरण समारोह के फोटो भी लिए जाएं। जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि साइकिल वितरण स्कूल में ही हुआ या बाहर से किया गया। उन्होंने सभी बीईओ, बीआरसी और जनशिक्षकों को यह निर्देश भी दिए हैं कि वे सभी स्कूलों का औचक निरीक्षण कर स्कूलों में एडमिशन, उपस्थिति आदि की स्थिति के साथ ही साइकिल वितरण की जानकारी एवं विद्यार्थियों से फीडबैक भी लें।

ललोई गांव के हाईस्कूल के विद्यार्थी मालथाैन से लेकर आए थे साइकिल
नए निर्देश जरूर जारी किए

भास्कर संवाददाता | सागर

स्कूलों में अध्ययनरत जिन विद्यार्थियों को साइकिलों का वितरण होना है, वह स्कूल परिसर से ही होगा। ब्लॉक मुख्यालय या अन्य किसी भी जगह आने के लिए विद्यार्थियों को बाध्य किया गया तो स्कूल प्राचार्यों के साथ ही बीईओ की भी जवाबदेही तय होगी। यह निर्देश जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी बीईओ को जारी किए हैं।

डीईओ शर्मा ने बताया कि मालथौन ब्लॉक के ललोई हाई स्कूल के विद्यार्थियों को 25 किलोमीटर दूर मालथौन विकासखंड मुख्यालय से साइकिल लाने की मजबूरी की जानकारी दैनिक भास्कर के माध्यम से लगी। यह सरासर गलत है। विद्यार्थी को इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। ऐसे में मैंने सभी बीईओ को निर्देश जारी किए हैं कि वह इस बात की सतत मॉनीटरिंग करें कि स्कूलों में साइकिल वितरण किस तरह से किया जा रहा है। इसके लिए सभी स्कूलों से प्रमाण के तौर पर साइकिल वितरण समारोह के फोटो भी लिए जाएं। जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि साइकिल वितरण स्कूल में ही हुआ या बाहर से किया गया। उन्होंने सभी बीईओ, बीआरसी और जनशिक्षकों को यह निर्देश भी दिए हैं कि वे सभी स्कूलों का औचक निरीक्षण कर स्कूलों में एडमिशन, उपस्थिति आदि की स्थिति के साथ ही साइकिल वितरण की जानकारी एवं विद्यार्थियों से फीडबैक भी लें।

चंद पैसे बचाने के लिए विद्यार्थियों

की जान डाली थी जोखिम में
नियमानुसार ब्लॉक मुख्यालय से साइकिल अपने-अपने स्कूल में ले जाने की जवाबदेही स्कूल प्रमुखों की है। इसके लिए बाकायदा पैसा भी विभाग द्वारा दिया जाता है। मालथौन से साइकिल बस से भी लाई जातीं, तब भी 10 रुपए प्रति साइकिल के हिसाब से ही पैसे लगते। पर यह पैसे भी बचाने के लिए प्राचार्य ने विद्यार्थियों की जान तक जोखिम में डाल दी और उन्हें फोरलेन से चलाकर ही साइकिल लाना पड़ी। फिलहाल मामले में प्राचार्य पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। डीईओ ने कहा है कि उनसे स्पष्टीकरण लिया जाएगा।

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