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पाठक मंच में हुई निबंध संग्रह \"अनुवाक\' पर चर्चा

3 वर्ष पहले
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साहित्य अकादमी संस्कृति परिषद की स्थानीय इकाई सागर पाठक मंच की मासिक समीक्षा गोष्ठी सिविल लाइन स्थित जेजे इंस्टीट्यूट में हुई। इसमें संस्कृत आचार्य कृष्णकांत चतुर्वेदी के निबंध संग्रह “अनुवाक्” पर संस्कृत विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. नौनिहाल गौतम ने कहा कि अनुवाक् भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं, साहित्यिक वैभव, दार्शनिक उदात्तता और परिवेश को प्रस्तुत करती है। इस ग्रंथ का आधार भी संस्कृत है । प्राचीन भारतीय ज्ञान वर्तमान में भी उपयोगी है। इसे उदार दृष्टि से देखने की आवश्यकता है। लेखक ने अपने कार्य क्षेत्र से साक्षात् अनुभव के आधार पर इसे लिखा है जिससे उसकी प्रमाणिकता विश्वसनीय है।

गोष्ठी के मुख्य अतिथि ‌‌‌संस्कृत विद्वान डॉ.राम रतन पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान समय में पूरे विश्व को संस्कृत की आवश्यकता है। संस्कृत के बगैर हमारा ज्ञान अधूरा है और हम संस्कृति से च्युत हो रहे हैं। आचार्य राधावल्लभ त्रिपाठी, आचार्य कृष्णकांत चतुर्वेदी, आचार्य वागीश शास्त्री जैसे पंडित संस्कृत के संवर्धन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास कर रहे हैं।

अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की पूर्व अध्यक्ष डॉ.कुसुम भूरिया दत्ता ने गोष्ठी में हुई चर्चा को सार्थक व महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पुस्तक में भारतीय संस्कृति तथा संस्कृत के पोषण के साथ उनके निबंधों में कालिदास,राजशेखर, फ्रेड्रिक मैक्समूलर आदि विद्वानों का समुचित चित्रण किया गया है।

गोष्ठी के शुरू में अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद गोस्वामी ने संस्कृत में सरस्वती वंदना की। श्रीफल भेंटकर अतिथि स्वागत किया गया। संयोजक उमाकांत मिश्र ने स्वागत भाषण एवं पुस्तक लेखक का परिचय दिया।

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