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47 साल बाद दीक्षांत समारोह : कभी राजनीति आड़े आई, कभी फंड की दिक्कत तो कभी गड़बड़ियों ने रोकी राह

3 वर्ष पहले
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देशभर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में हर साल दीक्षांत समारोह होते हैं और राज्य के विवि में पांच साल में एक-दो बार। लेकिन डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में 47 साल के बाद यह अवसर आया है। 1970 से अब तक विवि में 15 से भी ज्यादा कुलपति बदले गए। लेकिन इनमें से एक-दो को छोड़ दिया जाए तो किसी ने भी दीक्षांत समारोह कराने की कोशिश तक नहीं की। इसके ये कारण रहे -

दीक्षांत समारोह के लिए बड़े बजट की आवश्यकता होती है ऐसे में राज्य सरकारों से बजट न मिलना इसका एक बड़ा कारण रहा। केंद्र व राज्य में अलग-अलग पार्टियों की सरकार रही। इस द्वंद में भी नहीं हो सका समारोह। तत्कालीन कुलपति शिवकुमार श्रीवास्तव ने अपने कार्यकाल (1996 से 2002) के दौरान समारोह के लिए प्रयास किए। लेकिन राजनैतिक कारणों से असफल रहे। केंद्रीय विवि बनने के बाद अवैध नियुक्तियों के चलते राष्ट्रपति को बुलाने में शिकायत का डर लगा रहा। तत्कालीन कुलपति प्रो. एनएस गजभिए ने इस वजह से समारोह नहीं कराया। 2015 में विवि के कुलपति बने प्रो. आरपी तिवारी ने इस दिशा में शुरुआत की और 3 साल की मेहनत के बाद अब उनके कार्यकाल में 47 साल बाद आयोजन होने जा रहा है।

1970 में आए थे राष्ट्रपति गिरी तो उठी थी केंद्रीय दर्जे की मांग

डॉ. हरीसिंह गौर (केंद्रीय) विवि में 28 अप्रैल को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का आगमन हो रहा है। इसके पहले 1970 में तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी आए थे। उस समय राष्ट्रपति गिरी के समक्ष छात्रों ने विवि को केंद्रीय दर्जा दिए जाने की मांग की थी। अब यह विवि केंद्रीय हो चुका है। उस समय के छात्र संघ अध्यक्ष मानक लाल अग्रवाल “छुन्नन” हुआ करते थे।

राष्ट्रपति वहां बैठेंगे, जहां पीछे दीवार हो

छुन्नन अग्रवाल के अनुसार राष्ट्रपति के दौरे से तीन दिन पहले सेना का एक स्पेशल दस्ता विवि आया था। दस्ते ने कहा था कि मंच पर राष्ट्रपति के बैठने के लिए ऐसा स्थान होना चाहिए। जहां पीछे कांक्रीट की दीवार हो। राष्ट्रपति ने हम लोगों काे अंग्रेजी में शपथ दिलाई। एक अन्य कार्यक्रम राष्ट्रपति गिरी हिंदी नहीं आने की बात स्वीकारते हुए अंग्रेजी में ही भाषण दिया।

गौर प्रांगण में होगा कार्यक्रम

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दोपहर 12 बजे सागर पहुंचेंगे। दीक्षांत समारोह का आयोजन गौर प्रांगण से किया जाएगा। पहली पंक्ति में मप्र शासन के मंत्री, सांसद, विधायक और सेना के अफसर रहेंगे। वहीं इसके बाद जिला प्रशासन के अफसरों और छात्रों को जगह दी जाएगी। राष्ट्रपति के मंच पर आने से पहले रजिस्ट्रार फ्लैग के साथ आएंगे, इनके पीछे डीन ऑफ स्कूल्स, एकेडमिक काउंसिल, एक्जीक्यूटिव काउंसिल, वाइस चांसलर, चांसलर और फिर राष्ट्रपति का आगमन होगा।

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