भारतीय इतिहास और संस्कृति को बयां करती हैं पुरानिधियां : डा. नागेश दुबे
18 अप्रैल को विश्व विरासत दिवस पर प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग के संग्रहालय में विश्व विरासत दिवस मनाया गया।
इस मौके पर विभागाध्यक्ष प्रो. नागेश दुबे ने विश्व विरासत दिवस की महत्ता बताई और कहा कि हमारे संग्रहालय में संरक्षित एरण, रहली, घोड़ामाड़ा, तुमैन, त्रिपुरी, पिपरिया, मल्हार आदि स्थलों से प्राप्त पुरानिधियां भारतीय इतिहास एवं संस्कृति को बयां करती हैं।
संग्रहालय में संरक्षित एरण से प्राप्त गुप्तकालीन नृवराह, नृसिंह, गजलक्ष्मी एवं हरिहरहिरण्यगर्भ की महत्वपूर्ण प्रतिमाओं के साथ-साथ अनेक महत्वपूर्ण पुरानिधियां विद्यमान हैं जो मध्य प्रदेश के सांस्कृतिक गौरव की झलक प्रस्तुत करती है। प्रो. दुबे ने अपने व्यक्तव्य में धरोहर के प्रति लोगों को जागरुक होने की बात कही गई ताकि हम अपने गौरव के इन प्रतीक चिन्हों को सहेज कर रख सके जिनसे भावी पीढ़ियां भी लाभान्वित हो सके साथ ही इतिहास एवं पुरातत्त्व के क्षेत्र में कार्य कर रहे शोधार्थियों के द्वारा सामान्य जन में जागरुकता को फैलाने के लिए विशेष कार्य करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया।
इस अवसर पर विभाग के शिक्षक डाॅ. आर पी सिंह, डाॅ. एस के यादव, शोध छात्र सुल्तान सलाहुद्दीन, विशाल विक्रम सिंह, उमेश पाण्डेय, कृष्ण देव पाण्डेय, अशोक यादव, संजीव यादव, स्वदेश मिश्रा, आदिल खांन तथा प्रेम लाल के साथ विभागीय छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।