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काले हिरण के शिकार मामले में 1 वनपाल, दो वनक्षक निलंबित

3 वर्ष पहले
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17 सितंबर को पथरिया के बकैनी में काले हिरण के शिकार के मामले में डीएफओ एचएस मिश्रा ने एक वनपाल सहित दो वन रक्षकों को निलंबित कर दिया है। तीनों के खिलाफ सागर एसडीओ श्रद्धा पंद्रे ने नोटिस जारी करके पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन तीनों पेशी पर नहीं पहुंचे। जिसके चलते डीएफओे ने उन्हें सस्पेंड कर दिया। दरअसल इस मुद्दे को दैनिक भास्कर ने निरंतर उठाया। जांच से लेकर अधिकारी और आरोपियों की मिलीभगत को उजागर किया था। 12 खबरें प्रकाशित की गईं। जिसके बाद इस मामले की जांच टाइगर स्ट्राइक फोर्स (टीएसएफ) की एसडीओ श्रद्धा पंद्रे को सौंपी गई थी।

उन्होंने आरोपियाें के अलावा विभाग के संदिग्ध अमले का नार्कों टेस्ट लेने के लिए नोटिस जारी किए थे। जिन कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए, उन्होंने विभाग का सहयोग नहीं किया। बार-बार नोटिस मिलने के बाद जब वनपाल, वनरक्षक उपस्थित नहीं हुए तो उन्होंेने उनके घर पर जाकर नोटिस चस्पा कर दिए थे। जिसके बाद एक वनक्षक विकास श्रीवास्तव ने भोपाल में पेश होकर अपना दुखड़ा रोया था। बाद में उन्होंने अधिकारियों के सामने बयान दिए, तो सारी पोल खुल गई। जिसके बाद विभाग के अधिकारियों ने निलंबन की कार्रवाई की है।

डीएफओ श्री मिश्रा ने बताया कि 17 सितंबर को बकैनी में काले हिरण का शिकार किया गया था। जिसमें छह आरोपी बनाए गए थे, लेकिन इनमें से तीन आरोपियों को बचा लिया गया था।

आरोपियों को बचाने में पथरिया के वनपाल अर्जुन मरकाम, वनरक्षक विकास श्रीवास्तव, असगर खां और वनरक्षक संजय कुरेरिया की भूमिका संदिग्ध थे। इन्हें सागर सीसीएफ और कोर्ट से नोटिस जारी करके जवाब देने के लिए उपस्थित होने के आदेश दिए गए थे, ताकि बयान लिए जा सकें, लेकिन तीनों उपस्थित नहीं हुए।

केवल विकास श्रीवास्तव उपस्थित हुए, उनके बयान लिए गए, बयानों के आधार पर तीनों को निलंबित कर दिया गया। हालांकि अभी वनरक्षक अजय तिवारी और आशीष श्रीवास्तव के नाम से भी नोटिस जारी किए गए हैं। उन्हें भी जवाब देने के लिए बुलाया गया है।

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