पानी की कीमत तब होती है। जब पानी का अभाव होता है। लेकिन जब पानी की उपलब्धता हो और हम उसका जान-बूझ कर दुरुपयोग करें। ऐसी स्थिति में पानी का दुरुपयोग करने वालों पर अर्थदंड का प्रावधान होना चाहिए। यह बात आर्यिका विज्ञानमति माता ने सूबेदार वार्ड स्थित वर्धमान कॉलोनी जैन मंदिर परिसर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने नई बहू का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि शुद्ध घी एक चम्मच भी ज़मीन पर गिर जाए तो झगड़ा खड़ा हो जाता है । क्योंकि उसकी कीमत का हम ध्यान रखते हैं । पानी की कोई कीमत नहीं है इसीलिए हम कोई कीमत नहीं करते । आजकल देखने में आता है लोगों ने पानी की टंकी भरने मशीन लगा रखी है । टंकी भर भी जाए तो भी हज़ारों लीटर पानी बर्बाद होता रहता है । आजकल आधा गिलास पानी पीना फैशन सा गया है । सुनते हैं पहले सागर वाले गर्मी के मौसम में पानी को तरसते थे । पानी का संरक्षण भी सबसे बड़ी देश सेवा है ।
इसके पूर्व धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका सुवीर मति माता ने कहा कि माला फेरने मात्र से धर्म नहीं होता । धर्म हमारे आचरण में झलकना चाहिए । भोगविलास के साधन जुटाने में हम धर्म को हमेशा दूर रखते हैं । सभा का संचालन नन्हें भाई शास्त्री ने किया ।