मकरोनिया-प्रभाकर स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में सुखी एवं खुशहाल जीवन के लिए आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी शैलजा ने बताया कि भगवान से प्यार का मतलब यह नहीं है कि हमने कितनी पूजा आरती की है। बल्कि भगवान से प्यार का मतलब है कि हमने उनके कितने गुणों को धारण किया है।
शैलजा ने बताया कि जहां मैं नहीं हम का वास है वहां संगठन हैं। मैं अहंकार की निशानी है और हम संगठन की निशानी हैं। हमें संगठन में रहना है खुद की सेवा के साथ साथ विश्व की सेवा भी करनी है। यही सच्ची समाज सेवा है।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा पिछले 82 वर्षों से श्रेष्ठ जीवन एवं श्रेष्ठ समाज का निर्माण किया जा रहा है। संस्था का समाज सेवा वर्ग अपने आप में विशेष महत्व रखता है समाज सेवकों के लिए एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया है।
उन्होंने बताया वर्तमान समय अति दुख और अशांति का है। हम ऐसे समय संसार की कई आत्माओं को दुख अशांति गरीबी से निकालना चाहते हैं और बहुत हद तक अपने प्रयासों में सफल भी रहे हैं। हम भी अपने आप को अपनी श्रेष्ठ सेवा के बावजूद भी संतुष्ट अनुभव नहीं कर पा रहे हैं आज समाज के प्रत्येक व्यक्ति को स्थूल चीजों के साथ-साथ मन की शांति भी चाहिए जो हम भी दे सकते हैं। परंतु पहले स्वयं को सकारात्मक होना पड़ेगा और उसके लिए आध्यात्मिकता आवश्यक है आध्यात्मिकता अर्थात ईश्वर से संबंध सकारात्मक ऊर्जा ईश्वर के साथ हमारा अनुभव ऐसा ईश्वरीय अनुभव जिसमें हमारी अंतरात्मा में सकारात्मक परिवर्तन होता है। सेवा केंद्र प्रभारी ब्रह्मकुमारी छाया ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। ब्रह्मकुमारी माया ने ईश्वरीय परिचय सभी को दिया। ब्रह्माकुमारी कल्पना ने सभी को ईश्वरीय अनुभूति करायी। ब्रह्माकुमारी नीलम ने संचालन किया। कार्यक्रम मे पूर्व सरपंच हुकुम साहू गजराज सिंह जिला चिकित्सा अधिकारी, नीरज जैन सहित कई सामजिक कार्यकर्ता व सामजिक संगठन प्रमुख उपस्थित रहे।
सागर. प्रभाकरनगर मकरोनिया में ब्रह्माकुमारी शैलजा ने खुशी और खुशहाल जीवन पर दिया व्याख्यान।