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गोलियों की अपेक्षा इंसुलिन पर निर्भर व्यक्ति ज्यादा उम्र पाता है: डॉ. विक्रम सिंह

3 वर्ष पहले
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चिकित्सकों की संस्था एपीआई द्वारा इंसुलिन थैरेपी पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें जबलपुर से आए डॉ. विक्रम सिंह चौहान ने डायबिटीज जैसी जानलेवा बीमारी में नए इंसुलिन के उपयोग के बारे में चिकित्सकों को जानकारी दी और प्रश्नों का समाधान भी बेहद रोचक ढंग से किया।

उन्होंने बताया कि इंसुलिन पैंक्रियास ग्रंथि से निकलने वाला वह द्रव्य है जो खून में शक्कर की मात्रा को नियंत्रित करता है। यदि किसी कारण से इंसुलिन निकलना बंद हो जाए तो मनुष्य मधुमेह रोग से ग्रसित हो जाता है।

उन्होंने बताया कि किस तरह इंसुलिन डेगलुडक पुराने इंसुलिन से बेहतर है। ये दिन में केवल एक बार ही लिया जाता है और 42 घंटे तक काम करता है, जबकि बाकी लॉन्ग एक्टिंग इंसुलिन जैसे ग्लार्जिन या डेटेमिर 18 से 26 घंटे ही काम करते हैं। बेसल इंसुलिन में यह बाकियों से ज़्यादा अच्छा है। ऐसे में यदि बाहर से इंसुलिन दिया जाए तो शरीर उसे बिना किसी साइड इफेक्ट के गृहण कर लेता है। एक सर्वे के अनुसार इंसुलिन पर निर्भर व्यक्ति, गोलियों पर निर्भर व्यक्ति से ज़्यादा उम्र पाता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता एपीआई अध्यक्ष डॉ. अमिताभ जैन ने की और चेयरपर्सन के रुप में डॉ. बीके मिश्रा और डॉ. एनएस मौर्या मौजूद थे। सचिव डॉ. प्रदीप चौहान ने कार्यक्रम का संचालन किया।

एपीआई की संगोष्ठी : नई इंसुलिन थैरेपी के डायबिटीज बीमारी में उपयोग पर जानकारी दी

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