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तीसरी मंजिल पर पहुंचने में दिव्यांगों को होती थी परेशानी, सीनियर्स ने पैसे इकट‌्ठा कर बना ली लिफ्ट

3 वर्ष पहले
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रैगिंग को लेकर आम तौर पर सीनियर जूनियर स्टूडेंट्स में मारपीट की घटनाएं आम हो चुकी हैं, लेकिन शहर के एक इंजीनियरिंग कालेज के सीनियर छात्रों ने कुछ ऐसा किया। जिससे सीनियर और जूनियर के बीच का भेद ही खत्म हो गया। इन सीनियर्स ने दिव्यांगों की परेशानियों की देखते हुए पहले रुपए इकट्ठे किए। फिर प्रयोग करते हुए कालेज में खुद लिफ्ट लगा दी। इससे वे दिव्यांग जूनियर अब बेहद खुश हैं। जिन्हें पहली से लेकर तीसरी मंजिल तक जाने में काफी कठिनाइयां झेलनी पड़ती थी।

यह लिफ्ट एडिना काॅलेज में पढ़ने वाले इंजीनियर की पढ़ाई कर आयुष शर्मा, सतीश प्रजापति, सचिन रोहित, रिजवान अख्तर, शैलेंद्र गुप्ता, अभय यादव, वसीम अहमद, वरूण महार और दीपक रोहित और पुष्पेंद्र रैकवार ने तैयार की है। लिफ्ट को उन्होंने प्रोजेक्ट की तरह लिया और करीब दो महीने की कड़ी मेहनत के बाद उसे तैयार कर लिया। छात्रों का कहना है कि दिव्यांगों की परेशानियों को देखते हुए लिफ्ट तैयार करने का प्रस्ताव कालेज प्राचार्य आरएस पांडे और एचओडी विकास मुखारया के सामने रखा था। लेकिन जब उन्होंने बताया कि यह लिफ्ट खुद अपने हाथों से तैयार करेंगे, तो तुरंत ही इसकी मंजूरी दे दी। लिफ्ट के खर्च को भी उन्होंने इतना कम किया कि सभी 10 स्टूडेंट्स ने कलेक्शन से ही उसे पूरा कर लिया। छात्रों द्वारा तैयार यह लिफ्ट 5 लोग आसानी से ऊपर-नीचे ले जा सकती है।

छात्रों ने 5-5 हजार रुपए इकट‌्ठा किए, कुल 45 हजार रुपए में ऐसी लिफ्ट तैयार की जिससे 5 लोग आसानी से ऊपर-नीचे जा सकें

मैकेनिकल के छात्रों द्वारा तैयार की गई यह लिफ्ट उन सभी दिव्यांगों के लिए किसी गिफ्ट से कम नहीं है जो कॉलेज की तीसरी मंजिल तक नहीं पहुंच पाते थे।

दूसरे चित्र में लिफ्ट बनाने वाली टीम।

3 लाख रुपए की लिफ्ट

45 हजार में बनाई

छात्रों ने कॉलेज में जो लिफ्ट लगाई है कि उसकी कीमत भी मार्केट में लगने वाली लिफ्ट से करीब 85% कम हैं। मैकेनिकल के छात्रों के इसको कंस्ट्रक्शन साइड पर लगाई जाने वाली टेम्परेरी लिफ्ट के फॉर्मूले पर तैयार किया है। जिसको वायर से ऊपर की ओर लिफ्ट करने की जगह लोहे की चैनल पर रोल फॉर्मूले पर बनाया है, जो लिफ्ट दीवार से सटकर चलती है। इससे सेफ्टी को लेकर भी पूरा ध्यान दिया गया है। इसके लिए गति काफी रखी गई है।

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