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हॉस्टल बनने में लगेगा साल भर, इसलिए स्कूल प्रबंधन ने अपने खर्चे पर किया 100 विद्यार्थियों के रहने-खाने और कोचिंग का इंतजाम

3 वर्ष पहले
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शहर के एक्सीलेंस स्कूल में 100 सीटर हॉस्टल स्वीकृत हो चुका है। करीब 3.86 करोड़ की लागत से बनने वाला यह हॉस्टल साल भर में बन पाएगा।

इतने में शैक्षणिक सत्र 2018-19 पूरा ही निकल जाएगा। ऐसे में दूर अंचल से आने वाले नवमी के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसका बीड़ा स्कूल प्रबंधन और डीईओ ऑफिस ने उठाया है। दोनों ने मिलकर 100 बच्चों (50 छात्र-50 छात्राओं) के रहने-खाने और कोचिंग की मुफ्त व्यवस्था की है। 15 जून से स्कूल खुलते ही यह सुविधा विद्यार्थियों को मिलने लगेगी।

सत्र 2018-19 से कक्षा-9वीं से 12वीं तक सभी परीक्षाओं में सौ फीसदी रिजल्ट लाने के लक्ष्य के साथ यह नवाचार किया जा रहा है।

मिशन-100 : एक्सीलेंस स्कूल प्रबंधन और डीईओ ऑफिस ने की व्यवस्था

छात्राएं स्कूल बिल्डिंग और छात्र शिक्षक सदन में रहेंगे

छात्र और छात्राओं के रहने की व्यवस्था अलग-अलग की गई है। छात्राएं स्कूल बिल्डिंग के ही एक ब्लॉक में रहेंगी, तो छात्रों के रहने की व्यवस्था शिक्षक सदन में की गई है। दोनों जगह अलग-अलग मैस होंगी। यहां पर साफ-सफाई करा दी गई है। अब आवास और मैस के लिए जरूरी संसाधन जुटाए जा रहे हैं।

छात्राएं स्कूल बिल्डिंग और छात्र शिक्षक सदन में रहेंगे

छात्र और छात्राओं के रहने की व्यवस्था अलग-अलग की गई है। छात्राएं स्कूल बिल्डिंग के ही एक ब्लॉक में रहेंगी, तो छात्रों के रहने की व्यवस्था शिक्षक सदन में की गई है। दोनों जगह अलग-अलग मैस होंगी। यहां पर साफ-सफाई करा दी गई है। अब आवास और मैस के लिए जरूरी संसाधन जुटाए जा रहे हैं।

5 छात्रों से प्रयोग, एक जेईई में हुआ सफल : स्कूल के प्राचार्य आरके वैद्य ने बताया कि सत्र 2017-18 में हमारे पास विद्यार्थी नारायणपुर गांव के विकास सेन का आवेदन आया था। उसे यह सुविधाएं दी गईं। बाद में 4 छात्र और जुड़ गए। पांचों विद्यार्थी हायर सेकंडरी के रिजल्ट में 85 फीसदी से अधिक अंकों से पास हुए। विकास सेन न सिर्फ 89 फीसदी अंकों से पास हुआ, बल्कि जेईई में भी सिलेक्ट हुआ।

विशेषज्ञ आएंगे, किताबें-गाइड, नोट्स भी मिलेंगे : डीईओ संतोष शर्मा ने बताया कि विद्यार्थियों की प्रतिभा का सही विकास हो, इसीलिए यह व्यवस्थाएं की हैं। 9वीं के विद्यार्थी तो यहां रहेंगे ही, कक्षा-10वीं से लेकर 12वीं तक के जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए भी ऐसी व्यवस्था की जाएगी। विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए विषय विशेषज्ञ बुलाए जाएंगे। अन्य शहरों से भी फैकल्टी आएंगी। जरूरत की सभी किताबें, गाइड, नोट्स उपलब्ध रहेंगे।

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