शाहगढ़ क्षेत्र का मलकुआ देखते ही देखते तालाब वाले किसानों का गांव बन गया है। साल भर पहले इस गांव में किसान बबलू यादव के खेत में एक तालाब था।
दूसरे किसानों ने जब उसे खेत में बने तालाब से फसल की सिंचाई करते देखा तो वे भी अपने खेत में तालाब बनाने लगे। महज एक साल में गांव के बीस किसानों ने अपने खेत में तालाब बनाए। पूरे गांव में सिर्फ 24 किसान है।
इनमें से 20 किसान तालाब वाले किसान कहलाने लगे हैं। अब इन्हे बारिश का इंतजार है। क्योंकि मानसून आते ही तालाब में खेतों का पानी भरने लगेगा। जिससे वे अपनी फसल की सिंचाई साल भर करेंगे। पहले इस गांव में पानी न होने की वजह से फसल भी ठीक से नहीं होती थी। लेकिन बबलू को खेत के तालाब से फसल सींचते देख एक-एक करके बीस किसानों ने प्रधानमंत्री वाटर शेड खेत-तालाब योजना के तहत तालाब बनाए है।
बबलू यादव ने बताया खेत में बने तालाब की बदौलत खरीफ, रबी के बाद ज़ायद की फसल मूंग भी बोई है। ऐसा पहली बार संभव हुआ है। इससे पहले साल में दो फसलें ही लेते। इस बार तीसरी फसल लेने की तैयारी चल रही है। गांव के वे किसान जिनने हाल ही में खेत तालाब बनाया है।
उनमें से राम सिंह, कृष्ण कुमार, राकेश यादव का कहना है कि बबलू की तरह हम दो से तीन फसलें तक लेंगे। क्योंकि हमारे खेत में भी तालाब है।
वहीं बबलू यादव ने बताया चने की फसल की उत्पादकता पिछले साल के मुकाबले बढ़ गई है। जिस खेत से पहले 6 क्विंटल चना निकलता था। अब उसमें 9 क्विंटल चना पैदा हुआ है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि सिंचाई वाटर शेड विकास योजना ने शाहगढ़ के मलकुंआ को बना दिया तालाबों वाला गांव
शाहगढ़ के मलकुंआ गांव का यह है पहला खेत तालाब।
जल भंडारण क्षमता बढ़ी
जिला वाटरशेड सेल के तकनीकी विशेषज्ञ जय गुप्ता ने बताया कि जिले की भौगोलिक स्थिति और सूखे के हालातों के बीच शाहगढ़ समेत जिले 7 विकासखंड में अब तक 411 तालाब किसानों के खेतों में बन चुके हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई वाटरशेड विकास योजना के इन तालाबों की जल भंडारण क्षमता 14 लाख 38 हजार 500 क्यूबिक मीटर है। इससे 1000 हैक्टेयर एरिया सिंचित होगा। वहीं दूसरी ओर 29 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमीन के अंदर पहुंचेगा।
किसानों की जुबानी
बारिश के पानी से भरे तालाबों से पलेवा के साथ किसान दो सिंचाई खेत में लगी फसल की करेंगे। खेत में तालाब बनने के करण आसपास के ट्यूबवेल व कुओं का जलस्तर भी ऊपर आएगा। यह तालाब रहली, बंडा, शाहगढ़, जैसीनगर, राहतगढ़, केसली और खुरई क्षेत्र के किसानों के खेतों में बने है। रहली के धनगंवा निवासी दिनेश रावत बताते हैं कि उन्होंने खेत में तालाब बनाया था, पहली बारिश से ही उसमें पानी भरने लगा था। तालाब में पानी भरा होने के कारण चने और गेंहूू की फसल के लिए पलेवा किया और बाद में सिंचाई भी की। इससे गेहूं की फसल पकने तक हरी थी। इससे लाभ भी हुआ। गेहूं की पैदावार भी बढ़ी है। वहीं बरखेरा के किसान पूरन सिंह ने खेत में बने तालाब के फायदे बताए और कहा तालाब बनवाने से कोई घाटा नहीं हुआ।