दो बार एग्जाम निरस्त होने के बाद अब जाकर यह परीक्षा होने जा रही है। इससे पहले वर्ष 2014 में शासन द्वारा महाविद्यालयों में खाली पड़े सहायक प्राध्यापकों की परीक्षा कराने के लिए तैयारियां शुरू कर दी थीं। उसी साल आवेदन पत्र बुलाए जाने के बाद परीक्षा निरस्त कर दी गई थी। इसके बाद वर्ष में दोबारा आवेदन बुलाए गए और परीक्षा दूसरी बार भी परीक्षा निरस्त कर दी गई। तीसरी बार वर्ष 2017 में भी परीक्षा के आवेदन बुलाए गए तो उसमें भी कई अड़चनें आईं। करीब तीन बार संशोधन करने के बाद 10 मई तक आवेदन जमा होने का काम चलता रहा।
30 हजार आवेदनों में सबसे ज्यादा हिंदी, इतिहास और कैमिस्ट्री विषय में : प्रदेश भर से करीब 30 हजार 495 आवेदकों ने पीएससी परीक्षा के लिए आवेदन किए हैं। सबसे ज्यादा हिंदी विषय में करीब 4 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किए हैं। इसके बाद इतिहास और कैमिस्ट्री विषय का नंबर है। तीनों विषयों को मिला लें तो कुल आए आवेदनों की संख्या करीब 10 हजार बनती है। यानी एक तिहाई अभ्यर्थी इन तीन विषयों में ही परीक्षा देने के लिए बैठेंगे।
अभ्यर्थी बहुत कम थे, इसलिए नहीं बनाए सेंटर
Ãअभ्यर्थियों के हित को ध्यान में रखकर ही सागर सहित सात सेंटर पर परीक्षा कराना प्रस्तावित था। लेकिन सागर, उज्जैन और सतना के लिए बहुत कम आवेदक आए। स्थिति यह बन रही है कि कहीं सुबह की शिफ्ट तो कहीं शाम की शिफ्ट में परीक्षा देने वाला ही कोई नहीं है। इसके चलते सागर सहित तीन शहरों में सेंटर अब नहीं बनाए जा रहे हैं। तीनों ही शहरों के लिए आवेदन करने वालों को अब नजदीकी परीक्षा केंद्र पर भेजा जाएगा। - डॉ. पीसी यादव, परीक्षा नियंत्रक, एमपी पीएससी