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मृतकों के नाम पर जारी हो रहीं किस्तें, अब तक नहीं खुले वारिसों के बैंक खाते

3 वर्ष पहले
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प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बीएलसी में नई गड़बड़ी सामने आई है। हालांकि इसमें फिलहाल भ्रष्टाचार तो सामने नहीं आया है लेकिन नगर निगम की प्रशासनिक अकर्मण्यता जरूर जाहिर हुई है। स्कीम में पात्र पाए गए अलग-अलग वार्ड के 36 हितग्राहियों की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके खातों को अब तक निष्क्रिय नहीं कराया गया है। नियमानुसार इन हितग्राहियों की जगह उनके वारिस का नाम जोड़कर उनके बैंक खाते में योजना की किस्तें दी जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। जानकारी के मुताबिक मृत हितग्राहियों के खातों में एक से तीन तक किस्तें जमा हो चुकी हैं। वहीं कुछ ऐसे भी हैं, जिनके खाते में एक भी किस्त नहीं आई है।

बीएलसी को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने की परिषद की बैठक बुलाने की मांग

बीएलसी में गड़बड़ियों के रोजाना हो रहे खुलासे को लेकर निगम के नेता प्रतिपक्ष अजय परमार ने आयुक्त अनुराग वर्मा को पत्र लिखा है। इसमेें परिषद की बैठक बुलाने की मांग की गई है। उनका कहना है कि 23 जुलाई की बैठक में तय हुआ था कि एक सप्ताह बाद बीएलसी समेत अन्य अावासीय योजनाओं को लेकर बैठक बुलाई जाएगी। जिस पर अब तक अमल नहीं हुआ है। उन्होंने बैठक में स्मार्ट सिटी योजना की प्रगति, नगर निगम की सीमा वृद्धि, शहरवासियों को रोजाना 24 घंटे पानी, राजघाट की जलग्रहण क्षमता बढ़ाने के बारे में भी चर्चा कराने की मांग की है।

रविशंकर वार्ड के पार्षद पति के खिलाफ कलेक्टर से शिकायत : रविशंकर वार्ड पार्षद गायत्री बाई के पति अखिलेश घोषी के खिलाफ वार्ड की कुछ महिलाओं ने बीएलसी योजना के तहत अवैध वसूली करने की कलेक्टर से शिकायत की है। वार्ड की महिला शारदाबाई, हृदेश विश्वकर्मा, सुनीता साहू, कमला आदि का कहना है कि पार्षद के पति अखिलेश एक प्रकरण मंजूर कराने के एवज में 20 से 50 हजार रुपए तक वसूलते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों के केस मंजूर किए हैं, जो पहले से पक्के मकान में रहते हैं। वहीं कई लोग ऐसे हैं, जिन्होंने रकम मिलने के बाद अब तक कोई निर्माण नहीं कराया।

परिजन खुद आकर नहीं बताते

तो पता ही नहीं चलती समस्या

बीएलसी के हितग्राहियों की मृत्यु के संबंध में निगम को काफी समय तक जानकारी ही नहीं मिली। नतीजतन उनके खातों में रकम जमा होती रही, लेकिन जब बैंकों ने खातेधारियों के वारिसों को रकम देने से मना किया तब कहीं यह समस्या सामने आई। इस मामले में बैकिंग संबंधी कामकाज के लिए बीएलसी से जोड़े गए एनजीओ के संचालक संजय मिश्रा का कहना है कि लगभग सभी मृत हितग्राहियों के परिजनों ने अावेदन के जरिए खुद को वारिस घोषित कर दिया है। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया है।

एमआईसी में मंजूरी के लिए रखे जाएंगे ये केस: पूरनलाल अहिरवार प्रभारी ईई, नगर निगम का कहना है कि एनजीओ के अनुसार बीएलसी घटक के 36 हितग्राहियों की मृत्यु हो चुकी है। केस में उनका नाम दर्ज करने के लिए फाइल तैयार हो गई है। इसे एमआईसी में रखा जाएगा। इसके बाद अगली किस्तें वारिसाें के खाते में आएंगी।

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