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बीएमसी में बगैर चीर-फाड़ इंटरवेशन रेडियोलॉजी से पहली बार हुई आंत की सर्जरी, तीन साल के यश की बचाई जान

3 वर्ष पहले
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बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग ने सोनोग्राफी के पेडिंग केस खत्म करने के बाद एक बड़ा कारनामा कर दिखाया है। विभाग ने संभाग में पहली बार इंटरवेशन रेडियोलॉजी के माध्यम से बगैर चीर-फाड़ किए आंत का ऑपरेशन किया है। इतना ही नहीं विभाग के चिकित्सकों ने इस ऑपरेशन के जरिए तीन साल के यश भदौरिया की जान भी बचा ली। अब यश पूरी तरह स्वास्थ्य है और उसकी मुस्कुराहट भी वापस लौट आईं है। विभाग की इस सफलता पर बीएमसी डीन डॉ. जीएस पटेल ने हर्ष व्यक्त किया और आगे भी इस तरह के ऑपरेशन जारी रखने के निर्देश दिए।

चिकित्सा

एक सप्ताह पहले बार-बार उल्टी और खाना न खाने की शिकायत लेकर भर्ती हुआ था संत रविदास वार्ड का यश

ऑपरेशन नहीं होता तो यश को आंतों में हो सकता था गैंगरीन

रेडियोलॉजी विभाग के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. वृषभान अहिरवार बताते हैं कि एक सप्ताह पहले संत रविदास वार्ड निवासी तीन वर्षीय यश भदौरिया को बार-बार उल्टी और खाना न खाने की शिकायत लेकर भर्ती किया गया था। लेकिन जब उसकी जांच हुई तो यश को इंटूस्सेक्सन नाम की बीमारी थी, जिसमें उसकी आंतों में आंतें फंस गई थीं। आंतों में आई यह रुकावट गैंगरीन में तब्दील होने वाली थी। बीमारी का पता लगते ही सर्जरी विभाग डॉक्टर्स ने उसके ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी। लेकिन यश की उम्र कम थी और यदि उसके सीने में चीरा लगाते तो बड़ी परेशानी भी सामने आ सकती थी। ऐसे में हमने इंटरवेशन रेडियोलॉजी की यूएसजी गाइडेड तकनीक अपनाई और बिना चीरा लगाए ही आंतों को अलग-अलग कर दिया। इस ऑपरेशन में सर्जरी विभाग के डॉ. र|ाकर और निश्चेतना विभाग के डॉ. अमित जैन का भी सहयोग रहा।

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