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सोशल रिफॉर्मर की तरह पत्रकारिता करते थे डाॅ. अंबेडकर: सुधीर

3 वर्ष पहले
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दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सुधीर जैन ने कहा कि आंबेडकर की पत्रकारिता एक सोशल रिर्फामर की पत्रकारिता थी, उन्होंने समाज की बुराइयों, रूढिय़ों और कुरीतियों को दूर करने में अखबार को माध्यम बनाया। समाज में समता, न्याय, सद्भाव के लिए हमें बाबा साहेब की पत्रकारिता नई राह दिखा सकती है। वे यहां सिविल लाइन स्थित इंक मीडिया पत्रकारिता संस्थान में बाबा साहेब आंबेडकर की 127 वीं जयंती के अवसर पर ‘पत्रकारिता अवदान्’ विषय पर आयोजित परिसंवाद में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि समाज में आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक व वैधानिक साम्य लाना ही पत्रकारिता का मूल ध्येय होना चाहिए। आंबेडकर ने अपनी पत्रकारिता में समाज के उस वर्ग का नेतृत्व किया जो शोषित व दमित था।

मुख्य अतिथि समाजसेवी डॉ. दिवाकर मिश्र ने कहा कि नई पीढ़ी को गांधी, आंबेडकर की पत्रकारिता से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में इस समय विघटन के जो बीज रोपे जा रहे हैं उससे इन महापुरूषों के विचार व पत्रकारिता एक औषधि का कार्य करती है। विशेष अतिथि शिवरतन यादव ने कहा कि किसी भी समाज में पत्रकारिता का कार्य पथप्रदर्शन का होता है। समाज की बुराइयों को उजागर कर उनका समाधान करना ही एक पत्रकार का कार्य है, इस भूमिका में बाबा साहेब बिल्कुल सटीक बैठते हैं।

संस्थान के निदेशक डॉ. आशीष द्विवेदी ने डॉ. आंबेडकर के अखबारों पर चर्चा करते हुए बताया कि उनके शीर्षकों में ही उनके भाव निहित हैं। मूकनायक, बहिष्कृत भारत, समता, जनता, प्रबुद्ध भारत नाम से निकले उनके पांच अखबारों में ही बाबा साहब के विचारों की झलक देखी जा सकती है। पत्रकार के रूप में उनके अवदान् को कम ही लोग जानते हैं। डॉ. सत्या सोनी ने गांधी व आंबेडकर के विचारों के साम्य पर चर्चा की। संचालन अंबिका यादव व आभार डॉ. अशोक पन्या ने माना।

इस अवसर पर चंद्रप्रकाश शुक्ला, पंकज सोनी, शितांशु राजौरिया, अभिषेक रजक, असलम खान, अर्पित चौबे सहित संस्थान के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

परिसंवाद
इंक मीडिया संस्थान में पत्रकारिता अवदान विषय पर हुआ आयोजन
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