हवलदार पिता का ख्वाब पूरा, इकलौता बेटा बना सेना का जवान
एक पिता के लिए इससे ज्यादा गर्व की बात और क्या हाे सकती है कि उसका इकलौता बेटा उसी के सामने सैनिक बने। शुक्रवार को महार रेजीमेंट सेंटर की पासिंग आउट परेड में ऐसा ही एक पिता-पुत्र का जोड़ा गर्व से सीना चौड़ा किए मिला। इनमें से पिता यानी हवलदार अभिमन्युसिंह एमआरसी के एडम ऑफिस में पदस्थ हैं, वहीं बेटा अमरेंद्रसिंह ने हाल ही इसी महार रेजीमेंट सेंटर से सैनिक ट्रेनिंग पूरी की। अभिमन्युसिंह ने बताया कि मैं और मेरा बेटा एक ही परिक्षेत्र में थे लेकिन हमारी मुलाकातें बहुत कम हुईं। हम लोग केवल छुट्टी के दिन ही मिल पाते थे।आज मुझे गर्व है कि वह भी मेरी तरह देश के लिए न्योछावर होने वालों में सबसे आगे की पंक्ति में रहेगा। इससे पहले रेजीमेंट के शहीद अनुसुईया प्रसाद मैदान में पासिंग आउट परेड हुई। परेड की सलामी डिप्टी कमांडेन्ट कर्नल ब्रजेशसिंह ने ली।
Áमहार रेजीमेंट सेंटर में हुई पासिंग आउट परेड Áदेशभर से आए 158 युवक हुए सेना में शामिल
सागर. परेड की सलामी डिप्टी कमांडेंट कर्नल ब्रजेश सिंह ने ली।
देशभर से आए 158 जवान सेना को मिले
पासिंग आउट परेड में दो कोर्स के 158 जवान शामिल हुए। इस अवसर पर अपने संबाेधन में कर्नल सिंह ने महार रेजीमेंट के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज देश की सुरक्षा को पड़ोसी देशों के अलावा आंतकियों और अलगाववादियों से खतरा बना हुआ है। उम्मीद है कि यहां से मिली ट्रेनिंग के बलबूते पर आप उन्हें सबक सिखाने में देरी नहीं करेंगे। परेड के बाद ट्रेनिंग उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले रिक्रूट्स के अलावा उनके माता-पिता को भी गौरव पदक प्रदान किया गया। इस अवसर पर डिप्टी जीओसी जीजो जे ओझाकल समेत अन्य सैन्य अधिकारी, रिक्रूट्स और आसपास के स्कूली बच्चे मौजूद थे।
बेटा भी जवान हो गया।
बहन के चेहरे पर खुशी की चमक।
भाई को सैनिक वर्दी
में देख भर आई बहन
की आंखें
राजस्थान के जयपुर से आई नरेश कंवर ने पासिंग आउट परेड के बाद जैसे ही अपने भाई प्रतापसिंह को सैनिक वर्दी में देखा तो उसकी आंखें खुशी से भर आई। नरेश के साथ उसकी मां ओम कंवर भी आई थी। जयपुर निवासी इस परिवार ने बताया कि हमारे परिवार में इससे पहले कोई सैन्य सेवा में नहीं गया। हमें बहुत खुशी है कि अपने घर से एक जवान देश के लिए दे रहे हैं। परेड के आखिर में डिप्टी जीओसी ब्रजेशसिंह प्रतापसिंह के अलावा अन्य नव सैनिक व उनके परिजनों से मिले। उन्होंने संयुक्त रूप से इन सभी परिवारजनों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि आप ने अपने बेटों को सेना में भेजकर मातृभूमि का कर्ज अदा किया है।