- Hindi News
- National
- 1808 में बने मालथौन के किले की मरम्मत बिना सीमेंट के उपयोग से की गई ताकि वैभव जस का तस लौटा सकें
1808 में बने मालथौन के किले की मरम्मत बिना सीमेंट के उपयोग से की गई ताकि वैभव जस का तस लौटा सकें
किले की आलीशान छत, जिससे दिखता है पूरा नगर
ऐसी हो गई थी हालत
सागर | 6 एकड़ में फैले मालथौन किले का वैभव दोबारा लौट आया है। गुंबद-दीवारों की चमक और छत की रौनक देखकर ऐसा लगता है कि जैसे इसका निर्माण हाल ही में हुआ हो। बिना सीमेंट के उपयोग के ही किले को ईंट-गिट्टों के चूर्ण, चूना, बेल रस एवं गुड़ आदि के मिश्रण से पुराना स्वरूप देने का काम चल रहा है। गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह एक करोड़ रुपए की लागत से इसका जीर्णोद्धार करा रहे हैं। यहां एक पार्क भी बनना है। उन्होंने ऐसे ही खुरई के डोहेला के किले को भी संवारा है।
फिर खड़ी हुई दीवार
Áकंटेंट | संदीप तिवारी Áफोटो | रिंकू सरवैया
दीवारें ढहने लगी थीं
ईंट-गिट्टों के चूर्ण, चूना, बेल रस एवं गुड़ आदि से ऐसा मिश्रण होता है तैयार।
राजा मर्दन सिंह जू देव ने कराया था निर्माण
Áनवंबर 2017 से चल रहा है मरम्मत और पुराने स्वरूप में लाने का काम।
Áपरिसर में 4 कोठियां हैं। महाकाली भी विराजमान हैं।
Áकिले के अंदर की तीन बावडिय़ों में मात्र तीन से चार फीट पर पानी है, जो कभी नहीं सूखता।
Áकिले को संवार रहे भिंड के लोग इससे पहले चंदेरी और भिंड के किलों को भी इसी प्रक्रिया से नया रूप दे चुके हैं।