मिलन-मंथन: पत्रकारिता में किताबी व मैदानी ट्रेनिंग 50-50% होना चाहिए
सागर. एलुमिनी मीट में सीनियर और जूनियर ने एक साथ साझा किया मंच। इनसेट : मीट में नए पुराने साथियों ने ली खूब ली सेल्फी।
खिलखिलाते चेहरों के साथ पत्रकारों ने किया फिर मिलने का वायदा
भास्कर संवाददाता | सागर
पत्रकारिता में अब मैदानी ट्रेनिंग और क्लास रूम का अनुपात 50-50 होना चाहिए। कोर्स में बहुत कुछ मेटेरियल अव्यवहारिक है, जैसे एडवरटाइजमेंट वाला हिस्सा। मूलत: यह विषय मार्केटिंग से जुड़ा है। कुल मिलाकर पत्रकारिता से जुड़े संस्थानों में कोर्स ऐसा हो कि डिग्री मिलते ही उसे जॉब मिलने में कठिनाई नहीं हो। यह ब्लू प्रिंट विवि के पत्रकारिता विभाग की एलुमिनी मीट के आखिरी दिन हुए मिलन-मंथन में तैयार हुआ, जिसे अब विवि के कुलपति डॉ. आरपी तिवारी को साैंपा जाएगा। एलुमिनी मीट में देशभर से करीब 175 पत्रकारों ने शिरकत की।
प्रेस काउंसिल ऑफ
इंडिया, एडिटर्स गिल्ड...अब औचित्यहीन : उपासने
दूसरे दिन के मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि के कुलपति जगदीश उपासने ने कहा कि एडिटर्स गिल्ड, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को औचित्यहीन बताया। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि फेक न्यूज को लेकर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक आदेश जारी किया। इस बारे में एडिटर्स गिल्ड ने 8 घंटे बाद ट्वीट किया। जबकि इससे पहले ही मंत्रालय अपना आदेश वापस ले चुका था।
उपासने ने कहा कि इन संस्थाओं में पत्रकार और पत्रकारिता से डिस्कनेक्ट लोग बैठे हुए हैं। आगे उन्होंने कहा कि हमें फ्लेक्सिवेल कोर्स तैयार करना चाहिए। पश्चिम में प्रिंट मीडिया तेजी से खत्म हो रहा है अब वहां डिजिटल मीडिया में असली खेल चल रहा है। हमें इस पर ध्यान देना होगा। केवल रोजी रोटी के लिए पत्रकार नहीं बनना चाहिए। इस एल्युमिनी में 34 साल पुराने तक पत्रकार मौजूद हैं। जिसका लाभ देशभर को मिलना चाहिए। उपासने ने कहा कि स्ट्रिंगर्स सबसे ज्यादा संघर्ष करते हैं, लेकिन वे ही सर्वाधिक उपेक्षित रहते हैं।
संस्थानों को ग्रामीण पत्रकारिता की तरफ मुड़ना होगा
पूर्व एचओडी डॉ. प्रदीप कृष्णात्रे ने कहा कि संस्थानों को रूरल यानी ग्रामीण पत्रकारिता पर नए सिरे से ध्यान देना होगा। वर्तमान में इसी क्षेत्र में काम करने की जरूरत ज्यादा है। उन्होंने संस्था प्रमुखों से कहा कि कन्टेंट एनालिसिस को अपने कोर्स में अनिवार्य रूप से रखने का सुझाव दिया। यह वो तरीका है, जिससे हम पत्रकारिता को समाज के लिए और प्रभावी व रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं।
पत्रकारिता की चुनौतियां पढ़ाई के दाैरान ही मालूम होना चाहिए : पीपी सिंह
माखनलाल चतुर्वेदी विवि के पूर्व कुलपति प्रो. पुष्पेंद्रपाल सिंह ने कहा कि ये बहुत जरूरी है कि पत्रकारिता के विद्यार्थियों को इस पेशे की चुनौतियां प्रशिक्षण के दौरान ही बताई जाएं। उन्हें इस बात का ज्ञान होना चाहिए कि वे किस नोबल कॉज से जुड़ने जा रहे हैं। उन्होंने सरकारी क्षेत्र में जनसंपर्क एवं माध्यम में नवोदित पत्रकारों के प्रवेश के लिए कुछ टिप्स व जानकारी दी। पूर्व शिक्षक डॉ. अनिल किशोर पुराेहित ने विभाग में मास्टर बल्देवप्रसाद पीठ बनाने का सुझाव दिया। जिसमें देश-प्रदेश के व्यवहारिक एवं सीनियर पत्रकारों को जगह दी जाए। इससे भी विभाग का उन्नयन होगा।
छात्र क्षमताओं की पहचान करना संस्था की जवाबदेही : द्विवेदी
बंसल न्यूज के स्टेट ब्यूरो शरद द्विवेदी ने कहा कि संस्थानों की ये जवाबदेही होना चाहिए कि वे पत्रकारिता के छात्र की क्षमताओं को पहचानें। जैसे कोई छात्र भाषा, शब्द और वाक्य विन्यास का अच्छा जानकार है तो उसे डेस्क पर काम करने में प्रवीण करें। जो छात्र समाचार भांपने में, जानकारी निकालने में माहिर है, उसे रिपोर्टिंग की तरफ ले जाएं। उन्होंने कहा कि आप लोग अपने पाठ्यक्रम में फेरबदल का इंतजार क्यों करते हैं। मीडिया के जो भी नए-नए स्वरूप जैसे साेशल मीडिया, उसकी विश्वसनीयता, उपयोग आदि को पढ़ाना शुरु करें। इससे पहले उन्होंने प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की व्यवहारिक चुनौतियों के बारे में बताया।
सीनियर पत्रकारों ने आयोजक मंडल का स्वागत किया
पूरे दिन चले सत्र के बाद आयोजक मंडल का देश-प्रदेश से आए पत्रकारों ने स्वागत-सम्मान किया। इनमें डॉ. शैलेंद्र ठाकुर, गुंजन शुक्ला, चंदू चौबे, डॉ. रजनीश जैन, डॉ. प्रदीप पाठक, वीनू राणा, डॉ. अनिल किशोर पुराेहित, र|ेश रावत, राकेश शुक्ला, आशीष ज्योतिषी शामिल थे। जबकि आयोजन में वरिष्ठ पत्रकार डॉ. शिवकुमार विवेक, सत्या शिवरमन, राजेश सिरोठिया, दीपक तिवारी, ब्रजेश राजपूत, सुधीर जैन, सूर्यकांत पाठक, ममता यादव, मोहम्मद आरिफ, डॉ. आशीष द्विवेदी, डॉ. विवेक तिवारी, मनोज रजक, देवेंद्र यादव विभाग के पूर्व एचओडी, केजी मिसर, डॉ. राकेश शर्मा, डॉ. ललित मोहन, रचना मिश्रा आदि शामिल हुए।