बीडीए का पहले दफ्तर छिना, सिर्फ दो कर्मचारी बचे थे वो भी वापस बुला लिए
राजनीतिक समीकरण साधने का जरिया बना बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण लगभग खत्म होने की स्थिति में है। वर्ष 2016 में प्राधिकरण बोर्ड गठन के साथ ही सरकार ने बजट में 2 करोड़ सालाना की कटौती कर ली।
सर्किट हाउस-2 में खुला प्राधिकरण का कार्यालय भी 2017 के दौरान छिन गया। इस ऑफिस में प्रतिनियुक्ति पर जो दो कर्मचारी तैनात थे, अब उन्हें भी मूल विभाग में वापस बुला लिया गया है। बीडीए का काम अतिरिक्त प्रभार के तौर पर योजना एवं सांख्यिकी विभाग संभालेगा। बीडीए में वर्षों से काम कर रहे दो कर्मचारी केके पाठक और सतीश श्रीवास्तव को उनके मूल विभाग (शिक्षा) में वापस बुलाया गया है। सर्किट हाउस 2 के पास स्थित एक बिल्डिंग में चल रहा दफ्तर तत्कालीन कमिश्नर डाॅ. मनोहर अगनानी ने इसलिए खाली करा लिया क्योंकि वे यहां टेनिस कोर्ट बनवाना चाहते थे। इधर, बीडीए ऑफिस संभागायुक्त बिल्डिंग में शिफ्ट करा दिया गया। हास्यास्पद यह है कि इसके बाद संभागायुक्त बिल्डिंग से भी बीडीए ऑफिस को डेरा उठाकर योजना एवं सांख्यिकी में रखना पड़ा। अब यहां कर्मचारी भी नहीं बचे हैं।
भास्कर संवाददाता | सागर
राजनीतिक समीकरण साधने का जरिया बना बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण लगभग खत्म होने की स्थिति में है। वर्ष 2016 में प्राधिकरण बोर्ड गठन के साथ ही सरकार ने बजट में 2 करोड़ सालाना की कटौती कर ली।
सर्किट हाउस-2 में खुला प्राधिकरण का कार्यालय भी 2017 के दौरान छिन गया। इस ऑफिस में प्रतिनियुक्ति पर जो दो कर्मचारी तैनात थे, अब उन्हें भी मूल विभाग में वापस बुला लिया गया है। बीडीए का काम अतिरिक्त प्रभार के तौर पर योजना एवं सांख्यिकी विभाग संभालेगा। बीडीए में वर्षों से काम कर रहे दो कर्मचारी केके पाठक और सतीश श्रीवास्तव को उनके मूल विभाग (शिक्षा) में वापस बुलाया गया है। सर्किट हाउस 2 के पास स्थित एक बिल्डिंग में चल रहा दफ्तर तत्कालीन कमिश्नर डाॅ. मनोहर अगनानी ने इसलिए खाली करा लिया क्योंकि वे यहां टेनिस कोर्ट बनवाना चाहते थे। इधर, बीडीए ऑफिस संभागायुक्त बिल्डिंग में शिफ्ट करा दिया गया। हास्यास्पद यह है कि इसके बाद संभागायुक्त बिल्डिंग से भी बीडीए ऑफिस को डेरा उठाकर योजना एवं सांख्यिकी में रखना पड़ा। अब यहां कर्मचारी भी नहीं बचे हैं।
बरामदे में रखनी पड़ी अलमारी
योजना शाखा में भी बीडीए कार्यालय को संचालित करने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं हो पाने के कारण अलमारियों में भरे बीडीए के दस्तावेजों को बरामदे में रखना पड़ा है। प्राधिकरण के दफ्तर के लिए मेनपानी में जमीन की तलाश की जा रही है। अभी तक उस पर भी सहमति नहीं बन पाई है। इधर, प्राधिकरण का बजट अगले महीने आएगा। इस पर योजना शाखा ही आगे की कार्रवाई करेगा।