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बच्चों ने खेल-खेल में सीखा रंगों का संयोजन और स्केचिंग, अब सलाद डेकोरेशन की तैयारी

3 वर्ष पहले
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संभागीय बाल भवन में इन दिनों बच्चे ऊंचाई छूने की दौड़ में शामिल हो चुके है। बच्चों का एक समूह अपनी नन्हीं उंगलियों से बड़ी तन्मयता से पेंसिल शेडिंग कर रहे तो दूसरे समूह के बच्चे न्यूज पेपर आर्ट, अनुपयोगी वस्तुओं से आकर्षक श्रृंगार दान, फ्लावर पाट आदि बनाना सीख रहे हैं। संभागीय बाल भवन के सहायक संचालक रोहित बड़कुल ने बताया अब तक 170 बच्चों के पंजीयन किए जा चुके हैं। हमारा 1000 बच्चों के रजिस्ट्रेशन का लक्ष्य है। हमारा जोर बच्चों की मानसिक व नैसर्गिक क्षमताओं के विकास पर केंद्रित है। इससे ही बच्चों में एकाग्रता, आत्मविश्वास, संप्रेषण एवं सृजनात्मकता बढ़ती हैं। प्रतियोगिताओं में अधिक से अधिक बच्चों की भागीदारी हो।

इसके लिए बाल भवन में बच्चों को सबसे पहले चित्रकला के लिए प्रेरित किया जाता है। इसके तहत इन दिनों बच्चे स्केचिंग, रंगों का संयोजन, क्रेआंस, वॉटर कलर, पोस्टर कलर, ऑइल पेंटिंग सीख रहे है। वहीं दूसरी ओर गीत, वाद्य तथा नृत्य, त्रय संगीत यानी गायन, वादन, नृत्य तीनों का समावेश है। इसमें बच्चे लोक संगीत, सुगम संगीत, शास्त्रीय गायकी व वादन का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इसके साथ ही बच्चों को सरल से सरल उपायों द्वारा खेल-खेल में ताल और लय नृत्य की शिक्षा भी अगले सप्ताह से दी जाएगी है। नृत्य एक पूजा है जिसमें नम्रता व आदर करना सिखाया जाता है।

पद्माकर नगर स्थित संभागीय बाल भवन में बच्चे पेंसिल ऑर्ट सहित अन्य कलाएं सीख रहे हैं।

भास्कर संवाददाता | सागर

संभागीय बाल भवन में इन दिनों बच्चे ऊंचाई छूने की दौड़ में शामिल हो चुके है। बच्चों का एक समूह अपनी नन्हीं उंगलियों से बड़ी तन्मयता से पेंसिल शेडिंग कर रहे तो दूसरे समूह के बच्चे न्यूज पेपर आर्ट, अनुपयोगी वस्तुओं से आकर्षक श्रृंगार दान, फ्लावर पाट आदि बनाना सीख रहे हैं। संभागीय बाल भवन के सहायक संचालक रोहित बड़कुल ने बताया अब तक 170 बच्चों के पंजीयन किए जा चुके हैं। हमारा 1000 बच्चों के रजिस्ट्रेशन का लक्ष्य है। हमारा जोर बच्चों की मानसिक व नैसर्गिक क्षमताओं के विकास पर केंद्रित है। इससे ही बच्चों में एकाग्रता, आत्मविश्वास, संप्रेषण एवं सृजनात्मकता बढ़ती हैं। प्रतियोगिताओं में अधिक से अधिक बच्चों की भागीदारी हो।

इसके लिए बाल भवन में बच्चों को सबसे पहले चित्रकला के लिए प्रेरित किया जाता है। इसके तहत इन दिनों बच्चे स्केचिंग, रंगों का संयोजन, क्रेआंस, वॉटर कलर, पोस्टर कलर, ऑइल पेंटिंग सीख रहे है। वहीं दूसरी ओर गीत, वाद्य तथा नृत्य, त्रय संगीत यानी गायन, वादन, नृत्य तीनों का समावेश है। इसमें बच्चे लोक संगीत, सुगम संगीत, शास्त्रीय गायकी व वादन का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इसके साथ ही बच्चों को सरल से सरल उपायों द्वारा खेल-खेल में ताल और लय नृत्य की शिक्षा भी अगले सप्ताह से दी जाएगी है। नृत्य एक पूजा है जिसमें नम्रता व आदर करना सिखाया जाता है।

सिलाई-कढ़ाई : बच्चियों की रुचि ड्राफ्टिंग, पेपर कटिंग, कपड़े काटना व सिलने में सबसे ज्यादा है। वे कढ़ाई में आगे चलकर विभिन्न प्रकार के स्टिच सीखेगी।अनुदेशक सुचेता दुबे ने बताया कि स्मोकिंग, टक्स, प्लेट आदि बनाने के अतिरिक्त बुनाई में स्वेटर, मोजा, टोप, मफलर, शाल, जरी कार्य, मेटीकार्य, राखी व सॉफ्ट टॉयज बनाना भी सिखाया जाएगा।

गृह-विज्ञान : बच्चों को गृह-विज्ञान में पोषण आहार, गृह सज्जा, मेहंदी, रंगोली व जूट कार्य ,मेक्रमवर्क आदि सीखने के लिए पूरी स्वतंत्रता दी गई है।

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