6 सप्ताह के भीतर फार्मेसी लाइसेंस का निराकरण करें : हाईकोर्ट
नवीनीकरण की फीस लेने के बाद भी लाइसेंस रिन्यू नहीं करने के मामले में हाईकोर्ट ने फार्मेसी काउंसिल को 6 सप्ताह में मामले का निराकरण करने के आदेश दिए हैं।
अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ने बताया कि गोपालगंज निवासी राकेश जैन को फार्मेसी काउंसिल ने फार्मेसी लाइसेंस 28 जनवरी 1984 को जारी किया था। काउंसिल द्वारा मैट्रिक पास अभ्यर्थियों के लिए वर्ष 1982 में प्रदेशभर में जारी किए गए लाइसेंसों में अनियमितताओं को लेकर हाईकोर्ट जबलपुर और इंदौर में कई याचिकाएं दायर की गईं। इसके बाद प्रकरण आर्थिक अपराध जांच एजेंसी को दिया गया। कई दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई भी की गई। काउंसिल ने प्रदेश में ऐसे हजारों फार्मेसी लाइसेंस जारी किए थे, जिनमें लाइसेंसधारी जारी दिनांक को 18 वर्ष के नहीं थे। राकेश जैन का लाइसेंस जांच में वैध पाया गया, लेकिन काउंसिल ने हाईकोर्ट के प्रकरण का हवाला देकर नवीनीकरण नहीं किया। यही लाइसेंस नंबर 2016 में रीवा के एक अन्य व्यक्ति के नाम जारी कर दिया। डॉ. जैन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। प्रारंभिक सुनवाई में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने काउंसिल को आदेशित किया है कि पिटीशनर के लाइसेंस से संबंधित निर्णय 6 सप्ताह में डिसाइड करे।