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सिटी लिंक रोड में बाधक सौ कब्जे हटाए; जेसीबी जिस टपरे को ढहा रही थी, उसमें रखे थे 2 गैस सिलेंडर...हादसा टला

3 वर्ष पहले
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सिटी लिंक रोड में बाधक बने 100 से ज्यादा कब्जे शनिवार को हटाए गए। इस दौरान एक बड़ा हादसा टल गया। हुआ यह कि मकरोनिया चौराहे के पास जेसीबी जिस टपरे को तहस नहस कर रही थी उसमें दो भरे हुए सिलेंडर रखे हुए थे। गनीमत रही कि जेसीबी का पंजा सिलेंडर पर नहीं पड़ा वरना वह फट सकता था। मकरोनिया चौराहे से हॉक कैंटीन तक रोड के दोनों तरफ रखे टपरे, पक्के चबूतरे, सीढ़ियां, छज्जे और रैंप अादि पर जेसीबी चली। अतिक्रमण हटाने के लिए करीब 5 घंटे तक लगातार मुहिम चली। इस दौरान अधिकारियों के पास कुछ अफसर व नेताओं के फोन भी आए, लेकिन किसी को ज्यादा रियायत नहीं मिली।

मकरोनिया चौराहे से सुबह 11 बजे एसडीएम एलके खरे व सीएसपी आरएस चौहान के साथ अतिक्रमण अमले ने अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई शुरू की। सबसे पहले चौराहे से सिविल लाइंस तरफ की राेड के दोनों तरफ की दुकानों के आगे लगे रैंप, बाेर्ड व छज्जे हटाए गए। घरों की सीढ़ियां तोड़ दी गईं। फल, चाय-पान की गुमटी हटाईं गईं। अतिक्रमण दस्ता यहां से डॉ. एनपी शर्मा, डॉ. जीएस चौबे के हॉस्पिटल के सामने से अतिक्रमण हटाते हुए आगे बढ़ा। यहां रोड किनारे रखे जनरेटर हटाने के लिए एक दिन की मोहलत दी गई। बंडा रोड से भी जल्द अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरु होगी।

कब्जे न हटाने के लिए अफसर-नेताओं के फोन आए, नहीं रुकी जेसीबी

सागर. मकरोनिया चौराहे पर अतिक्रमण हटाने के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

पार्किंग हटाने पर आया महिला पुलिस अफसर का फोन

शंकरगढ़ में एक घर के बाहर बनी पार्किंग हटाने के लिए भोपाल से एक महिला पुलिस अफसर का फोन आया। हालांकि बिना किसी पक्षपात के यहां से भी पार्किंग हटा दी गई। कार्रवाई को लेकर हड़कंप की स्थिति थी। कई लोग क्षतिग्रस्त होने के डर से खुद ही टपरे, रैंप, लोहे की सीढ़ी, बोर्ड आदि हटाने लगे थे। वहीं एक पार्षद पति और कुछ छुटभैया नेता भी अतिक्रमणकारियों के समर्थन में यहां पहुंचे थे।

...ऐसा साहस नालों से अतिक्रमण हटाने में कब दिखाएगा प्रशासन

सिटी लिंक रोड बना रहे ठेकेदार का काम आसान हो, इसलिए पूरा प्रशासन सड़क चौड़ी करने के लिए कूद पड़ा। इधर शहर में नालों पर सालों से जमे अतिक्रमण को हटाने में अफसरों की रुचि नहीं है। इसकी वजह साफ है कि यदि नालों से अतिक्रमण हटाते हैं तो उन्हें प्रभावशाली कई नेताओं से पंगा लेना पड़ सकता है। इसलिए कलेक्टर, निगम कमिश्नर भी चुप हैं और मिठबोले जनप्रतिनिधि भी शांत हैं।

मकरोनिया चौराहे पर टपरे को चैक किए बिना जेसीबी से ढहाया जा रहा था। जेसीबी ने 8-10 बार पंजे से प्रहार कर टपरा ढहाया। जैसे ही अंदर का सामान निकला तो सबके होश उड़ गए। अंदर दो भरे हुए गैस सिलेंडर रखे थे। उन्हें तुरंत हटाया गया। बड़ा हादसा टल गया।

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