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ग्रीन बिल्डिंग में 30 से 40 फीसदी बिजली और 30 से 70 प्रतिशत पानी की बचत होती है: डा. प्रशांती राव

3 वर्ष पहले
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परंपरागत तरीके से हो रहे भवन निर्माण में 40 प्रतिशत बिजली की ज्यादा खपत और 24 प्रतिशत कार्बन डाई आक्साईड का उत्सर्जन होता है। जबकि ग्रीन बिल्डिंग ऐसी इमारतें हैं जिनमें 30 से 40 प्रतिशत बिजली और 30 से 70 प्रतिशत पानी की बचत होती है। इसे बचाने के संसाधन अलग होते हैं, जिन्हें ग्रीन मेटेरियल कहा जाता है।

यह जानकारी स्कूल आफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल की विशेषज्ञ डॉ. प्रशांती राव ने ग्रीन बिल्डिंग अवधारणा और स्मार्ट सिटी के विभिन्न पहलुओं पर दिए व्याख्यान में दी है। इंजीनियर्स फोरम, एसीसी लिमिटेड और पॉलीटेक्नीक कॉलेज द्वारा शनिवार को संयुक्त रूप से ‘स्मार्ट सिटी में ग्रीन बिल्डिंग का महत्व, संभावनाएं और चुनौतियां’ विषय पर होटल दीपाली में आयोजित इस सेमीनार का उद्‌घाटन नगर निगम कमिश्नर अनुराग वर्मा ने किया और कहा कि शहरों के विकास के लिए भौतिक, संस्थागत, सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे के विकास की जरूरत है। ये सभी जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने, लोगों और निवेश को आकर्षित करने, विकास एवं प्रगति के एक गुणी चक्र की स्थापना में महत्वपूर्ण हैं। स्मार्ट सिटी का विकास इसी दिशा में एक कदम है। शहरों को स्मार्ट बनाने के लिए मुख्य रूप से तीन मॉडल पर काम होता है। रेट्रो-फिटिंग, पुनर्विकास, ग्रीन बिल्डिंग हरित क्षेत्र का विकास। डा. वर्मा ने बताया किसी स्मार्ट शहर के लिए स्मार्ट सुविधाएं दी जाती हैं जैसे ई-प्रशासन, इलेक्ट्रॉनिक सेवा आपूर्ति, वीडियो के जरिए अपराधों की निगरानी, जलापूर्ति प्रबंधन के लिए स्मार्ट मीटर, स्मार्ट पार्किंग तथा यातायात का स्मार्ट प्रबंधन। स्मार्ट सिटी लिमिटेड सागर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राहुल राजपूत ने भी अपने व्याख्यान में यही बात कही। पॉलीटेक्निक सागर के आर्किटेक्ट मुकेश शंखवार ने कहा कि शहर में खुलापन कम होता है। कोई भी शहर तब स्मार्ट शहर कहलाएगा जब उसमें 24 घंटे बिजली एवं पानी की सुविधा हो। ।सेमीनार में इंजीनियर फोरम के प्रकाश चौबे, इंजीनियर एसएस यादव, पालिटेक्निक कालेज के प्राचार्य वाय पी सिंह ने स्मार्ट सिटी को लेकर अपने विचार रखे।

जल संतोष से होता है बोरवेल रिचार्ज

मुख्य वक्ता संतोष वर्मा ने बताया कि जल-संतोष एक रूफटॉप वर्षा जल संचयन प्रणाली है, जिसमें छत पर गिरने वाले वर्षा के पानी को एक विशेष पद्धति से बोरवेल को रीचार्ज किया जाता है। यह न केवल भूजल स्तर को बढ़ाता है बल्कि पानी की गुणवत्ता में भी सुधार करता है। एसीसी लिमिटेड के तकनीकी प्रमुख अरुण चतुर्वेदी ने ग्रीन बिल्डिंग में इस्तेमाल होने वाली सीमेंट के बारे में जानकारी दी।

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