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वोटर लिस्टों में लाखों मृतक व गुमनाम, सागर में ज्यादा गड़बड़ी

3 वर्ष पहले
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प्रदेश की वोटर लिस्ट में लगभग पांच लाख मृतक और गुमनाम लोगों के घालमेल की शिकायत सामने आने के बाद राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री के सचिव चंद्रशेखर बोरकर से मप्र स्टेट इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेंट काॅर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के एमडी पद का चार्ज वापस ले लिया। इसकी जिम्मेदारी नवीकरणीय विभाग के प्रमुख सचिव मनु श्रीवास्तव को सौंप दी गई। यह कार्रवाई चुनाव आयोग को की गई शिकायत के आधार पर की गई।

बताया जा रहा है कि जिलों में कलेक्टरों द्वारा की गई जांच में सामने आया है कि पांच लाख से अधिक वोटरों का अता-पता ही नहीं है। सागर जिले में सबसे ज्यादा गड़बड़ी मिली है। वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का यह आंकड़ा चुनाव में नतीजे प्रभावित कर सकता है। वोटर लिस्ट के डेटा संग्रह का काम मुख्यमंत्री के सचिव व एमपीएसईडीसी के एमडी चंद्रशेखर बोरकर के पास था। बतौर एमडी वे इस काम को देख रहे थे। शेष | पेज 9 पर











यह थी शिकायत....
आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत को पत्र लिखा था, जिसमें यह कहा गया था कि सीईओ मध्यप्रदेश ने मतदाता सूचियों के डाटा काे अंतिम रूप देने का काम एमपीएसईडीसी को दे रखा है। दुबे ने कहा था कि इस संवेदनशील काम के तौर कहीं न कहीं मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े हैं, जिससे मतदाता सूची की गोपनीय जानकारी वहां तक पहुंच सकती है। इसलिए यह मामला पोटेंशियल कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट है। चुनाव आयोग ने इस काम से उन्हें अलग करने के सरकार को निर्देश दिए थे, जिस पर उन्हें शनिवार देर शाम हटा दिया गया।

प्रदेश में पांच करोड़ मतदाता, 1 प्रतिशत के नाम में गड़बड़
कलेक्टरों को आज हर हाल में देनी होगी रिपोर्ट

प्रदेश में फिलहाल 5 करोड़ के लगभग मतदाता हैं, जिनमें से 1 प्रतिशत मतदाताओं के नाम गड़बड़ होने की जानकारी है, जिसे दूर किया जाना है। मतदाता सूची के परीक्षण के काम में कलेक्टरों का सुस्त रवैया सामने आया है। अभी तक सिर्फ चार कलेक्टरों ने ही वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की जानकारी भेजी है, जिसे ठीक किया जा रहा है। इस पर सीईओ मध्यप्रदेश ने सभी कलेक्टरों को सख्त हिदायत दी है कि शनिवार शाम तक हर हालत में जानकारी भिजवा दें।

अभी तक चुनाव से 15 दिन पहले होता था फौरी परीक्षण
पहली बार मप्र में किसी विधानसभा चुनाव के आठ महीने पहले वोटर लिस्ट की जांच की जा रही है। इससे पहले चुनाव की तारीख के 15 दिन पहले ही फौरी तौर पर वोटर लिस्ट का परीक्षण किया जाता था, जिससे विधानसभा और लोकसभा चुनाव में फर्जी वोटिंग की आशंका बनी रहती थी। चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की जांच जिला कलेक्टरों को 10 मार्च को सौंपी थी, जिसकी रिपोर्ट उन्हें 7 अप्रैल यानी शनिवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) मप्र को सौंपना है।

25 हजार से ज्यादा वोटरों का पता बदला
सागर : 25 हजार से ज्यादा वोटर ऐसे हैं, जिनका पता बदल गया है। 9416 वोटरों का जो पता दर्ज है, वे वहां नहीं मिले। बड़ी संख्या मृतकों की है जो 5114 है। ये नाम न हटाए जाने की स्थिति में वोटर लिस्ट में यथावत बने रहते।

अशोक नगर

वोटर लिस्ट में मृतकों की संख्या 4312 है। 5680 ऐसे मतदाता है जो पते पर नहीं पाए गए हैं। जबकि 12091 कहीं और चले गए।

कोलारस विधानसभा उपचुनाव के दो दिन पहले कोलारस की वोटर लिस्ट में 13 हजार नामों में गड़बड़ी का पता चला था। शिवपुरी कलेक्टर ने आयोग को भेजी रिपोर्ट में यह खुलासा किया था। हालांकि आयोग ने चुनाव से ठीक पहले इन नामों को अलग कर फर्जी वोटिंग होने से रोक ली थी।

शिकायत मिलने के बाद आयोग ने की कार्रवाई
ग्वालियर

मृतकों की संख्या 6504 पाई गई है। वहीं 6649 लोग पते पर नहीं मिले।

सीहोर

वोटर लिस्ट में मृतकों की संख्या 4821 है। जबकि 4084 पते पर नहीं पाए गए। 7113 के पते बदले हैं।

चुनाव से पहले गड़बड़ी ठीक कर दी जाएगी
वोटर लिस्ट में बड़ी संख्या में डेथ और मिसिंग के मामलों में गड़बड़ी सामने आई है। चुनाव के पहले इसे ठीक कर दिया जाएगा। - सलीना सिंह, सीईओ, मध्यप्रदेश

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