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कु-संस्कृत साहित्य को न पढ़ें क्योंकि यह हमारी पीढ़ी को पतन के रास्ते पर ले जा रहा : आदित्य मति

3 वर्ष पहले
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पुराणों में लिखे मंत्र जाप अब इतिहास के पन्नों में बंद होते जा रहे हैं । हमने इनकी जगह ऐसे कुसंस्कृति वाले साहित्य पढऩा प्रारंभ कर दिया जो हमारी पीढ़ी को पतन के मार्ग पर ले जा रहे हैं ।

यह विचार आर्यिका आदित्य मति माता ने तिलकगंज जैन मंदिर में आयोजित चौंसठ रिद्धि विधान के अवसर पर व्यक्त किए । उन्होंने आचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि निस्सीम सागर महाराज का उदाहरण देते हुए कहा कि इस प्रकार के विधान आदि करने से हम वो सब आसानी से पा सकते हैं जिसके मिलने की हमें संभावना हो मगर संघर्ष ज्यादा हो। मंत्रों का जाप व आराधना जीवन में संयम को बढ़ाती है। वेद पुराण पढऩे की जगह टीवी पर दिखाई जा रही काल्पनिक कहानियों को ज़्यादा महत्व दे रहे हैं और अपना क़ीमती वक्त खराब कर रहे हैं । विधान की समस्त क्रियाएं ब्रह्मचारी विजय भैया के निर्देशन में संपन्न हुई। विधान में सौधर्म इन्द्र नेमीचंद चौधरी, कुबेर मनीष दलपतपुर, यज्ञनायक नरेन्द्र नायक, ईशान इन्द्र सुधीर घड़ी, महेन्द्र दिलीप शाह, सनत इन्द्र प्रमोद जतारा को बनने का सौभाग्य मिला। शांतिधारा जीवनलाल मिठया, शिखरचंद जैन, अशोक खुर्देलीय, विजय, महेन्द्र, मनीष ने की।

आर्यिका संघ का विहार : आर्यिका विज्ञानमति माता का संघ सहित शुक्रवार को शाम पांच बजे तिलकगंज से विहार हुआ। वे ससंघ सूबेदार वार्ड स्थित वर्धमान कालोनी जैन मंदिर पहुंची ।

आदिनाथ मंदिर में सिद्धचक्र विधान संपन्न

सागर. आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पायगा में सिद्धचक्र विधान का आयोजन हुआ। इसमें भक्तों ने सिद्धों की आराधना करते हुए पुण्य का संचय किया साथ ही मंडल पर श्रीफल अर्पित किए। शुक्रवार को हवन के साथ विधान का समापन हुआ । विधान पुण्यार्जक जीवनलाल बड़कुल केवलारी प्रदीप जैन, निर्मल लट्टू, सौरभ ईशुरवारा, कस्तूर चन्द, उदयचंद परसोरिया वालों के सानिध्य में हुआ। इसमें राकेश, मोतीलाल ने सहयोग दिया।

भास्कर संवाददाता | सागर

पुराणों में लिखे मंत्र जाप अब इतिहास के पन्नों में बंद होते जा रहे हैं । हमने इनकी जगह ऐसे कुसंस्कृति वाले साहित्य पढऩा प्रारंभ कर दिया जो हमारी पीढ़ी को पतन के मार्ग पर ले जा रहे हैं ।

यह विचार आर्यिका आदित्य मति माता ने तिलकगंज जैन मंदिर में आयोजित चौंसठ रिद्धि विधान के अवसर पर व्यक्त किए । उन्होंने आचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि निस्सीम सागर महाराज का उदाहरण देते हुए कहा कि इस प्रकार के विधान आदि करने से हम वो सब आसानी से पा सकते हैं जिसके मिलने की हमें संभावना हो मगर संघर्ष ज्यादा हो। मंत्रों का जाप व आराधना जीवन में संयम को बढ़ाती है। वेद पुराण पढऩे की जगह टीवी पर दिखाई जा रही काल्पनिक कहानियों को ज़्यादा महत्व दे रहे हैं और अपना क़ीमती वक्त खराब कर रहे हैं । विधान की समस्त क्रियाएं ब्रह्मचारी विजय भैया के निर्देशन में संपन्न हुई। विधान में सौधर्म इन्द्र नेमीचंद चौधरी, कुबेर मनीष दलपतपुर, यज्ञनायक नरेन्द्र नायक, ईशान इन्द्र सुधीर घड़ी, महेन्द्र दिलीप शाह, सनत इन्द्र प्रमोद जतारा को बनने का सौभाग्य मिला। शांतिधारा जीवनलाल मिठया, शिखरचंद जैन, अशोक खुर्देलीय, विजय, महेन्द्र, मनीष ने की।

आर्यिका संघ का विहार : आर्यिका विज्ञानमति माता का संघ सहित शुक्रवार को शाम पांच बजे तिलकगंज से विहार हुआ। वे ससंघ सूबेदार वार्ड स्थित वर्धमान कालोनी जैन मंदिर पहुंची ।

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