अंतर्निकाय संविलियन के तहत अपने गृह जिले में जाने की आस लगाए बैठे सहायक अध्यापकों और अध्यापकों के लिए अच्छी खबर है। ठंडे बस्ते में जा चुकी यह प्रक्रिया दोबारा तेज हो गई है। प्रदेश भर से आए आवेदनों में संलग्न दस्तावेजों के सत्यापन का काम पूरा हो गया। 18 जिलों के आवेदनों का सत्यापन शेष रह गया था।
वह भी शुक्रवार को पूरा हो गया। जिले में यह काम दो माह पहले ही पूरा हो गया था, लेकिन अन्य जिलों की लेटलतीफी के चलते पूरी प्रक्रिया ही लेट हो गई। बहरहाल सत्यापन का काम पूरा होने के बाद अब आदेश जारी होना ही शेष हैं। जानकारी के मुताबिक जिले से करीब 800 से ज्यादा शिक्षकों ने अंतर्निकाय संविलियन के लिए ऑनलाइन आवेदन किए थे। इनमें 410 प्राइमरी और मिडिल के थे। यह सभी वे शिक्षक हैं, जो दूसरे जिलों यानी अपने गृह जिलों में जाना चाह रहे हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि कितने शिक्षकों ने सागर आने के लिए आवेदन किए हैं। सभी जिलों के पास सिर्फ यही जानकारी है कि उनके यहां से कितने शिक्षक जाना चाह रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि नया शैक्षणिक सत्र 10 जून से शुरू होने के पहले ही अंतर्निकाय संविलियन के आदेश जारी हो सकते हैं। जिससे शिक्षक अपने गृह जिले में भी पहुंच जाएं और बीच पढ़ाई में शिक्षक के स्कूल छोड़कर जाने के पहले ही वहां दूसरे शिक्षक की व्यवस्था की जा सके।
एनओसी मिलने के बाद अटक गई थी प्रक्रिया
अपने गृह जिलों में जाने के लिए शिक्षक लंबे समय से प्रयासरत थे। इसको लेकर कई बार आंदोलन भी हुए। इसी के बाद अंतर्निकाय संविलियन की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके लिए करीब 4 माह पूर्व आवेदन बुलाने के बाद प्रक्रिया शुरू हुई थी। विभिन्न जिलों के डीईओ ने उनके यहां से दूसरी जगह जाने वाले शिक्षकों के आवेदनों पर एनओसी भी जारी कर दी। स्थिति यह बनी कि जितने शिक्षक जिला छोड़कर जाना चाह रहे थे, लगभग उतने ही संबंधित जिले में आने के लिए भी प्रयासरत थे। इसके चलते कहीं भी पेंच नहीं फंसा। इस प्रकार दोनों ही जगह से एनओसी मिलने के बाद लगा कि आदेश जारी हो जाएंगे लेकिन प्रकिया बीच में ही रुक गई।