भारतीय गौ माता का वैज्ञानिक और आर्थिक महत्व, गौ उत्पाद, गौ आधारित चिकित्सा विषय पर शहर के मंगलम विहार गार्डन में शुक्रवार रात को संगोष्ठी हुई। इसमें प्रोजेक्टर के माध्यम से गाय के पंचगव्य से कैंसर जैसे असाध्य रोगों को मिटाने के लिए बनाई जा रही दवांइयों के बारे में बताया गया।
इसमें बतौर मुख्य अतिथि गांधीनगर (गुजरात) में बंशीगीर गौ शाला के संयोजक गोपालभाई सुथरिया ने गौ माता का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व बताते हुए नागरिकों से कहा कि गौ माता हमारे घर और जीवन से दूर हो गई, इससे हमारी तकलीफे और बढ़ गई हैं। आने वाली पीढ़ी में मानसिक और शारीरिक सुधार लाना है तो हमें वापस गौ माता से जुडऩा होगा। गौ माता के नजदीक रहकर सुखी जीवन जी सकते हैं। विशिष्ट अतिथि कनकमल कटारा ने कहा कि आज गौ मताएं गौ शाला तक ही सिमट कर रह गई है, वह घरों में वापस अपन स्थान बनाए इस पर चिंतन करना चाहिए। वर्तमान समय में गौ को किस तरह संरक्षण दें और क्या करें, इस पर भी मंथन करना होगा। प्रयोग के रूप में हम कुछ नहीं कर पा रहे है। गोविंदराम विराट, डॉ. विमलेश पंड्या, वमासा गौ शाला के वीरेंद्र सिंह राव, डॉ. मगनलाल पाटीदार, अशोक मेहता, महेश शुक्ला, राकेश पाटीदार ने उपरणा ओढ़ाकर अतिथियों का स्वागत किया। कांतिलाल पाटीदार ने अतिथि परिचय करवाया। आभार हरीशचंद्र सोमपुरा ने जताया।
गौ माता के महत्व पर सागवाड़ा में हुई संगोष्ठी, गुजरात के विशेषज्ञों का मिला सान्निध्य
कत्लखाने के सरकार नए लाईसेंस दे रही
सागवाड़ा. संगोष्ठी में मौजूद शहर के नागरिक।
अध्यक्षता कर रहे अहमदाबाद के डॉ. हितेश जानी ने गौ माता का वैज्ञानिक और आर्थिक महत्व बताते हुए कहा कि भारत में हर मिनट में 102 गौ वंश की हत्या हो रही है। सरकार कत्लखाने रोक नहीं रही, बल्कि नए कत्लखाने खोलने के लाईसेंस दे रही है। अगर हम गौ माता का दूध और घी खरीदना शुरू कर दें तो कत्लखाने अपने आप बंद हो जाएंगे। भारत में आयुर्वेद का मार्केट ग्रोथ कर रहा है।
गौ माता को कत्लखाने में जाने से रोकना होगा
सुथरिया ने कहा कि गौ माता को सुरक्षित रखने और उसे कत्लखाने में जाने से रोकने के लिए हमें उसके दूध और घी की पूरी कीमत देकर खरीदना होगा, ताकि गौ पालक अपनी गाय को बेचेगा नहीं। गौ पालक को प्रोत्साहन नहीं देने पर गौ पालक भी अपने घर से गाय को निकाल देगा, जो बाद में कत्लखाने तक जा पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में हमारे यहां 35 नस्ल की गौ माता बची हैं, जो विदेशी नस्ल की गायों से हर तरह श्रेष्ठ है। आज किसान और गौ माता दोनों तकलीफ में है। दोनों को बेहतर प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।