सबब जब सबक बनने लगे
सबब जब सबक बनने लगे
रिश्तों की अहमियत जब पराए बताने लगे
तो समझ लेना वक्त बदल रहा है
रिश्ता जब जाली-सा ऊलझने लगे
दूसरों की वजह से दूरियां बढ़ने लगे
तो समझ लेना आप बदल रहे हैं
फैसले जब आपके कोई और लेने लगे,
जुबान आपकी बेवजह लड़खड़ाने लगे
तो समझ लेना आपका जमीर बदल रहा है
रिश्तों को जब वक्त में कैद करने लगे
अफवाहों में दिलचस्पी दिखाने लगे
तो समझ लेना आपके चाहने वाले बदल रहे हैं
ऐसे में सब खोने से पहले कुछ को संभाल लीजिए
वजह न सही किसी को सही तलाश दीजिए।
-अनु रहमान, साहेबगंज