जलदाय विभाग की लापरवाही का आलम देखिए पिछले एक साल से तारानगर शहर सहित आसपास के करीब 150 गांवों के दो लाख लोगों को फिल्टर के नाम पर गंदा पानी पिलाया जा रहा है। गंदगी व काई जमा यह पानी लोगों के स्वास्थ्य पर भी भारी पड़ रहा है तथा वे जाने-अनजाने में कई रोगों का शिकार हो रहे हैं। गंधेली- साहवा जलप्रदाय योजना के तहत गांव के लोगों को शुद्ध पानी पिलाने की मंशा से वर्षों पूर्व साहवा में करोड़ों रुपए की लागत से तीन फिल्टर प्लांट बनाए गए थे। इन फिल्टर प्लांटों से पानी शुद्ध करके तारानगर शहरी क्षेत्र, विधानसभा क्षेत्र के सभी गांवों व नोहर-भादरा तहसील के एक दर्जन गांवों में सप्लाई किया जा रहा है। मगर पिछले एक साल से प्लांटों में फिल्टर होकर पानी जमा किए जाने वाले हौद की सफाई तक नहीं करवाई गई है। आलम ये है कि इन हौद में जमा पानी में गंदगी व काई तेर रही है। जिस पानी को पशु भी पीना पसंद नहीं करें, उसे लोगों को पिलाया जा रहा है। तारानगर विधानसभा क्षेत्र की शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की कुल आबादी दो लाख के करीब है। तारानगर शहरी क्षेत्र में योजना के तहत छह हजार 500 कनेक्शन व ग्रामीण क्षेत्रों में 150 गांवों के करीब 1500 जल कनेक्शन इससे जुड़े हुए हैं। फिल्टर प्लांटों पर पानी को साफ करने के नाम पर हर साल लाखों रुपए भी खर्च किए जाते हैं, मगर सारा काम ठेके पर होने के चलते लोगों को गंदा पानी पिलाया जा रहा है। पानी को शुद्ध करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर व फीटकरी भी बिना नाप-तोल के डाली जा रही है, क्योंकि नाप-तोल की अधिकतर मशीनें खराब पड़ी हैं।
राकेश लोहाड़िया एसई जलदाय विभाग, चूरू नेकहा कि तीन-चार दिन पूर्व साहवा फिल्टर प्लांट पहुंचा था, मगर समय नहीं होने के कारण पूरी तरह निरीक्षण नहीं कर पाया। अगर प्लांट के हौद में जमा पानी पर काई जमी हुई है व गंदा पानी सप्लाई किया जा रहा है, तो उसकी सफाई करवाई जाएगी। आगामी दिनों में फिर से फिल्टर प्लांटों का निरीक्षण किया जाएगा तथा कमियां मिलने पर ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।
सेहत से खिलवाड़ कर रहा जलदाय विभाग, एक साल से नहीं कराई फिल्टर प्लांट की सफाई, 2 लाख लोग पी रहे गंदा पानी
1985 में बना पहला फिल्टर प्लांट, पानी जांच की मशीनों पर जंग लगा हुआ है
जलदाय विभाग के फिल्टर प्लांट में बने पानी के बैडो में जम्मा कचरा।
एशिया का दूसरा पेयजल शुद्ध करने का प्लांट साहवा में 1985 में बनाया गया, इसके बाद 1992 में भी यहां पर दो अन्य फिल्टर प्लांट स्थापित किए गए, जिन पर करोड़ों रुपए खर्च हुए। इन तीनों फिल्टर प्लांटों से पहले 363 गांव जुड़े हुए थे, मगर बाद में अन्य स्थान पर प्लांट बनने से इनकी सप्लाई साहवा सहित आसपास के 150 गांवों में दी जाने लगी। गांवों की संख्या कम होने के बाद भी प्लांट में पानी की शुद्धता व सफाई को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया। हौद की गत वर्ष जरूर सफाई करवाई गई, मगर इस वर्ष इस तरफ ध्यान तक नहीं दिया गया।
जलदाय विभाग में बना फिल्टर हाऊस।
जलदाय विभाग में पानी फिल्टर करने के लिए बने प्लांट।
पानी की शुद्धता जांचने वाली लैब में कचरा, मशीनों पर जंग
पानी की शुद्धता जांचने के लिए फिल्टर प्लांट नंबर एक में लैब भी बनी हुई है, मगर इसमें जगह-जगह कचरा जमा पड़ा है। इसके अलावा पानी जांच की मशीनों पर भी जंग लगा हुआ है तथा कुछ खराब पड़ी है। कर्मचारी फिटकरी की व ब्लीचिंग पाउडर के कट्टे कंधों पर उठाकर ले जाते हैं। जलदाय विभाग के अधिकारी भी कई बार इन प्लांटों का निरीक्षण करने आते हैं, मगर हर बार आंख मूंदकर खानापूर्ति करके चले जाते हैं।
प्लांटों पर होनी चाहिए 18 कर्मचारी की ड्यूटी, ठेकेदार ने लगा रखे हैं मात्र छह : तीन प्लांटों पर 24 घंटे ड्यूटी देने के लिए अलग-अलग शिफ्ट के हिसाब से 18 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए, मगर ठेकेदार की ओर से फिलहाल छह कर्मचारियों से ही काम करवाया जा रहा है। ठेकेदार की ओर से नियुक्त से कर्मचारी पांच हजार रुपए प्रतिमाह पर काम कर रहे हैं तथा एक शिफ्ट में दो कर्मचारी तीनों प्लांटों को चलाते हैं, जिसके कारण ना तो समय पर पानी साफ हो पाता है और ना ही प्लांटों की समुचित देखभाल हो पाती है।
दूषित पानी पीने से हो सकते हंै उल्टी-दस्त व डायरिया जैसे रोग
साहवा सीएचसी प्रभारी डॉ.संजय वर्मा ने बताया कि लगातार दूषित पानी पीना हमारे शरीर के लिए बहुत ही हानिकारक है। पिछले कुछ माह से सीएचसी में दूषित पानी पीने से उल्टी-दस्त की शिकायत के रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। लगातार दूषित पानी पीने से पीलिया, दस्त, डायरिया, उल्टी सहित अन्य बीमारियां भी हो सकती हैं।