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पुरखा जमाना के रोटी - पीठा

3 वर्ष पहले
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छत्तीसगढ़ म मनाथे संगवारी

बारो महीना तिहार।

दिन भर उपास रहिथे

अउ संझौती करथे फरहार।।

किसम किसम के रोटी पीठा

नुन्हा त कतको गुरहा।

रंग घलो सादा पिंवरा

कईठन चेम्मर गुजगुजहा।।

चीला रोटी अड़बड़ लुदलुदही

जुड़ाय म अंटियाथे।

गरम गरम खाबे त

बंगाला चटनी संग म मीठाथे।।

ठेठरी रोटी गोलवा लमहरी

तीजा पोरा के चिन्हा आय।

खुरमी बना ले तीली डार के

दोनों संग बिकट मिठाय।।

पितरहा बरा ल का कहिवे संगी

दही संग म खाले।

गुलगुल फजिया गहूं पिसान के,

मस्कुरा म दबाले।।

खोंटवा देहरौरी एके बरोबर,

बरा के मुहरन दिखथे।

चाउर पिसान के अइरसा हा,

गुड़ के पाघ म लपटथे।।

चौंसेला ह चक चक ले पड़रा,

फरा सही ऐखर रंग।

अंगाकर रोटी सरी दिन बनथे,

छत्तीसगढ़िया मनके संग।।

भजिया अउ सोंहारी के,

कोनो खास नइये तिहार।

सगा नेवता करे बर,

बारो महीना बनथे बारम्बार।।

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