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गौ सेवक कभी निर्धन नहीं होता: केशव देव

3 वर्ष पहले
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कंचनपुर इलाके के गांव कुर्रेंदा मैं श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के पांचवे दिन आचार्य केशव देव ने कृष्ण जन्म की मनोहारी व्याख्या के साथ बाल लीलाओं और कंस वध का भजनों सहित विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य जन्म लेकर भी जो व्यक्ति पाप के अधीन होकर इस भागवत रुपी पुण्यदायिनी कथा को श्रवण नहीं करते तो उनका जीवन ही बेकार है और जिन लोगों ने इस कथा को सुनकर अपने जीवन में इसकी शिक्षाएं आत्मसात कर ली हैं तो मानों उन्होंने अपने पिता, माता और प|ी तीनों के ही कुल का उद्धार कर लिया है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने गोवर्धन की पूजा करके इंद्र का मान मर्दन किया। भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने का साधन गौ सेवा है। श्रीकृष्ण ने गोमाता को अपना आराध्य मानते हुए पूजा एवं सेवा की। आचार्य ने कहा कि गौ सेवक कभी निर्धन नहीं होता। परन्तु आज हमारे समाज में गोमाता को खास कर बूढ़ी गोमाता को या तो कसाई खाना में चन्द पैसे के लिए बेच देते हैं या फिर बीच रास्ते में छोड़ देते हैं। याद रखिए वो दिन दूर नहीं जब शुद्ध दूध और देशी घी खोजने से भी नहीं मिलेगा। इसलिए गोमाता की रक्षा करें और कसाई खाने में जाने से बचाएं। आचार्य ने कर्म की प्रधानता बताते हुए कहा प्रत्येक व्यक्ति को कर्म के माध्यम से जीवन में अग्रसर रहना चाहिए। श्रीमद् भागवत कथा साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन है। यह कथा बड़े भाग्य से सुनने को मिलती है। इसलिए जब भी समय मिले कथा में सुनाए गए प्रसंगों को सुनकर अपने जीवन में आत्मसात करें, इससे मन को शांति भी मिलेगी और कल्याण भी होगा। कलयुग में केवल कृष्ण का नाम ही आधार है जो भवसागर से पार लगाते हैं। परमात्मा को केवल भक्ति और श्रद्धा से पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि परिवर्तन इस संसार का नियम है। कथा समापन पर व्यासपीठ की आरती उतारी गई। अंत में सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।

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