भैसरू कलां के घरों में जलघर से नहीं पहुंच रहा पेयजल
गांव भैसरू कलां की 5500 से अधिक अबादी को पीने की पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। गांव में वाटर टैंक के निर्माण के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। ग्रामीण प्राइवेट सप्लायर से सिक्योरिटी देकर पानी खरीद रहे है। वहीं 70 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण पानी का बिल भी भरते है। गांव में लाखों रुपए खर्च कर जनस्वास्थ्य विभाग ने 2 वाटर टैंक बनवाए थे। ग्रामीणों ने वाटर टैंक में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग करने की शिकायत सीएम मनोहर लाल से की थी। शिकायत के बाद विभाग ने दोबारा से मरम्मत का कार्य शुरू किया। मरम्मत कार्य के कारण एक वाटर टैंक में पानी की कमी है। वहीं दूसरे टैंक में पानी की कमी के चलते गंदगी होने से मछलियां पनप रही है। पानी की कमी को पूरा करने के लिए जन स्वास्थ्य विभाग ने गांव में 2 फैलो ट्यूबवेल लगवाए है।
जलघर के एक टैंक में चल रहा मरम्मत कार्य, दूसरे खस्ताहाल टैंक में मछलियों की भरमार के चलते नहीं हो पाती सप्लाई
पिछले साल चलाया था लीकेज ठीक करने का अभियान
सरपंच के प्रतिनिधि सुशील कुमार का कहना है कि पिछले वर्ष जनस्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर पंचायत ने 41 लीकेज प्वाइंट को ठीक करवाया था। अब फिर लीकेज बहुत ज्यादा हो रही है। जिसके चलते पानी घरों में कम नालियों में ज्यादा बर्बाद हो रहा है। इस लीकेज के कारण 60 प्रतिशत घरों में कनेक्शन होने के बाद भी पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। सुशील के अनुसार जल्द ही अधिकारियों से मिल इसका समाधान कराने का प्रयास करेंगे।
बिजली नहीं आती
जन स्वास्थ्य विभाग के एसडीओ नरेश गर्ग का कहना है कि दिन में बिजली नहीं आने के कारण रात को ही पानी की सप्लाई दी जा रही है। एक वाटर टैंक में मरम्मत का कार्य चल रहा तो दूसरे के पानी को सुखा कर उसकी भी मरम्मत का कार्य जल्दी ही शुरू होने वाला है। ट्यूबवेल से ग्रामीणों को नियमानुसार पानी की सप्लाई दी जा रही है।
सांपला. गांव भैसरू कलां के जलघर टैंक में मछली पकड़ते बच्चे ।
पानी का निश्चित समय नहीं
सरपंच मीना देवी का कहना है कि गांव में पानी सप्लाई का कोई निश्चित समय नहीं है। ग्रामीण पूरा दिन खेतों में काम कर रहे है और रात को पानी के इंतजार में काटने को मजबूर है। जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और आला अधिकारियों से कई बार शिकायत मौखिक तौर पर की जा चुकी है। ग्रामीणों को जल्द से जल्द पीने का पानी मुहैया करवाया जाएगा। गांव में नहरी पानी 24 का आएगा। इससे भी समस्या का समाधान होगा।
तीन माह से किल्लत
गांव के वाटर टैंक की मरम्मत का कार्य चला है। पानी की किल्लत ज्यादा आई हुई है। ग्रामीण प्राइवेट पानी सप्लायर से प्रति माह 200 रुपए के हिसाब से पानी खरीद रहे है। कई ग्रामीण पानी का बिल भी दे रहे हैं। प्राइवेट सप्लायर से सिक्योरिटी लेकर पानी की सप्लाई दे रखी है। इस कार्य से प्राइवेट पानी सप्लायर प्रति माह लाखों रुपए की कमाई कर रहा है। लेकिन जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिक विभाग के अधिकारी ग्रामीणों की समस्या के समाधान के प्रति रूचि नहीं दिखा रहे हैं।