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‘रेलवे ट्रैक बनाने के लिए कर लिया जमीन का अधिग्रहण, अब 4 बच्चों का कैसे भरूंगा पेट’
भास्कर संवाददाता | बेड़िया/सनावद
सेल्दा स्थित थर्मल पावर प्लांट पर कोयला ले जाने के लिए निमाड़ खेड़ी से सेल्दा तक रेलवे ट्रैक का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित कर रेलवे ट्रैक का निर्माण किया जा रहा है। बुधवार को सेल्दा रोड स्थित डुडगांव में किसान की जमीन अधिग्रहित कर उस पर रेलवे ट्रैक का निर्माण किया गया। जिसका किसान ने विरोध किया लेकिन प्रशासनिक अमले सहित पुलिस बल होने से किसान के विरोध के बाद भी काम जारी रहा।
बेड़िया से करीब 1 किमी दूर सेल्दा रोड स्थित डुडगांव में किसान सेवकराम बिरला व भुवानीराम बिरला के खेत में रेलवे ट्रैक निर्माण के लिए बुधवार सुबह करीब 11 बजे प्रशासनिक अमला सहित एनटीपीसी के रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसान के विरोध करने के बाद भी खेत में मिट्टी डालकर ट्रैक का निर्माण किया। इस दौरान एसडीएम मधुवंतराव धुर्वे, एसडीओपी मानसिंह ठाकुर, बेड़िया टीआई राजेश यादव सहित एनटीपीसी के अफसर उपस्थित थे। किसान भुवानी राम बिरला ने बताया मेरे भाई सेवकराम बिरला व मेरे पास सवा-सवा एकड़ खेती है। रेलवे ट्रैक निर्माण में मात्र आधा एकड़ भूमि शेष बची है। जिस पर न तो खेती हो सकती है। न ही कोई उपयोग किया जा सकता है। पूरा खेत अधिग्रहित होने से अब परिवार के पालन पोषण में परेशानी होगी। चार बच्चों का पेट कैसे भरुंगा। प्रशासन मनमानी करते हुए पूरे खेत को अधिग्रहित कर रहा है। जबकि इसके बदले अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। खेत रहता तो परिवार का पालन पोषण हो सकता था। अब मुझे या बच्चों को नौकरी दी जाए तो परिवार का गुजर बसर होगा। मुआवजे की राशि से कितने दिन तक परिवार का पालन पोषण होगा।
निर्माण के लिए खेत पर पहुंचा प्रशासनिक अमला।
हाईकोर्ट ने कलेक्टर, एसडीएम को दिए थे निराकरण के निर्देश
किसान ने बताया जमीन अधिग्रहित करने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर हाईकोर्ट ने 4 दिनों में कलेक्टर व एसडीएम को उचित निराकरण करने के निर्देश दिए थे लेकिन 4 माह बाद भी अब तक कोई निराकरण नहीं किया गया। बुधवार को पूरा प्रशासनिक अमला खेत में पहुंच गया। साथ ही कार्रवाई शुरू कर दी। प्रशासन की मनमानी के कारण हमारा पूरा परिवार सड़क पर आ जाएगा।
किसान की जमीन पर जेसीबी मशीन से हो रहा काम।
नौकरी का नहीं प्रावधान, नहीं ले रहा मुआवजा
एसडीएम मधुवंतराव धुर्वे ने बताया कि किसान को जमीन देने के लिए कई बार सूचना दी लेकिन वह जमीन नहीं देना चाहता है। जिससे रेलवे ट्रैक निर्माण का काम प्रभावित हो रहा है। इसके चलते बल के साथ पहुंचकर काम किया गया। उसे नियमानुसार मुआवजा भी दिया जा रहा है लेकिन वह मुआवजे के बदले नौकरी की मांग कर रहा है। नियमानुसार नौकरी देने का प्रावधान नहीं है लेकिन पीड़ित प्रतियोगी परीक्षा में चयनित होता है तो उसे प्राथमिकता देने का प्रावधान है।