- Hindi News
- National
- गर्मियों में पक्षियों को देते हैं ग्लूकोज व दवाई, ठंडक के लिए लगाया कूलर
गर्मियों में पक्षियों को देते हैं ग्लूकोज व दवाई, ठंडक के लिए लगाया कूलर
बाहेती कॉलोनी निवासी सुजीत सोलंकी ने बताया पेशे से ड्रायवर हूं। 35 साल से पक्षियों की नि:स्वार्थ सेवा कर रहा हूं। मामा स्व. रामेश्वर चौहान से मिली प्रेरणा के चलते वह हर माह 3 हजार रुपए से बाजरा, गेहूं, ज्वार की खरीद करते हैं। प|ी सुनीता सोलंकी भी चूड़ी का व्यवसाय कर इस काम में सहयोग करती है। सुजीत सोलंकी ने बताया ठंड व गर्मी में पक्षियों के लिए विशेष सुविधा की गई है। इसके लिए छत पर एक कमरा बनाया गया है। जिसमें गर्मी के मौसम में कूलर से ठंडक दी जाती है। वहीं ठंड व बारिश में उष्णता बढ़ाने के लिए बड़ा बल्ब लगाता हूं। मेरे घर पर करीब 80 कबूतर, 17 लवबर्ड्स, 23 बजरी चिड़िया के साथ अन्य प्रजाति के बड़ी संख्या में पक्षी आते हैं।
कुछ व्यक्तियों ने पक्षियों को गर्मी से राहत देनेे के लिए पेश की मिसाल
दीप चौरे | सनावद
गर्मी में सूर्य की तेज धूप व लपट में आम लोगों की हालत खराब हो जाती है। ऐसे में पक्षियों के क्या हाल होते हैं इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। गर्मी में सुविधा के अभाव में कई पक्षी दम तोड़ देते हैं।
इन बेजुबान पक्षियों के संरक्षण के लिए शहर में कई लोग दाने पानी की व्यवस्था तो करते हैं लेकिन उन्हें लग्जरी सुविधा नहीं दे पाते लेकिन शहर के कुछ ऐसे पक्षी प्रेमी भी हैं जो भागदौड़ भरे जीवन में इन पक्षियों की सुविधा के लिए समय निकालकर सेवा कर रहे हैं। जहां उन्हें खाने के साथ उड़ने की आजादी भी मिलती है।
90 हजार का बनाया पिंजरा, दवाई से कर रहे इलाज
पंडित कॉलोनी निवासी मोहन निमाड़े ने बताया पेशे से होटल व्यवसायी हूं। पक्षियों के लिए दाना-पानी के पात्र की व्यवस्था करने की प्रेरणा पिता स्व. जगदीश निमाड़े से मिली। स्वयं के खर्च से 90 हजार रुपए का छायादार पिंजरा बनवाया है। जिसमें कई प्रकार के पक्षी रोज दाना चुगने आते हैं। गर्मी से बचाव के लिए दिनभर बैठे रहते हैं। कई बार पक्षी बीमार होने पर कम दाना खाते थे। इसके लिए नेट पर इलाज की प्रक्रिया देखी। गर्मी में ग्लूकोस, इलेक्ट्रॉल, टेरामाईसिन, बीटाडोंन से उनका इलाज किया। जिससे पक्षियों के पेट के कीड़े मर जाते हैं। पाचन तंत्र मजबूत होता है। कई बार घायल पक्षियों की मरहम पट्टी भी करते हैं। पक्षी भी इन्हें देख दाना खाने के लिए आसानी से पास आ जाते हैं।
ठंड में बल्ब से गर्मी व गर्मी में कूलर की व्यवस्था
छत पर पक्षियों के लिए बनाया छोटा सा स्वीमिंग पूल
सोलंकी कॉलोनी निवासी धनसिंह सोलंकी दुकान में काम करते हैं। उन्होंने बताया पक्षियों को दाना-पानी के पात्र के साथ ही विभिन्न मौसम के अनुसार फल देते हैं। मेरे मकान में किराए से रहने आईं इंदौर निवासी मीना झानिया रोज सुबह 5.30 बजे पक्षियों के लिए चावल, टुकड़ी, बाजरा, अंगूर सेवफल संतरे मूंगफली के दाने व हरी मिर्च के साथ चीटियों को चॉकलेट देती थी। उनके स्थानांतरण के बाद से मैने सेवा की। पक्षियों के लिए छत पर ही एक लोहे का टब बनाकर पानी रखा। जिसमें पक्षी स्वीमिंग पुल का मजा लेते हैं। इसी प्रकार तोड़ीपुरा निवासी अशोक वर्मा कारीगर का काम करते हैं। वे 30 सालों से पक्षियों के दाने-पानी के जलपात्र की व्यवस्था करते आ रहे हैं। उनके घर पक्षियों का डेरा जमा रहता है।