यज्ञ की ज्योति ही भगवान का स्वरूप : स्वामी सच्चिदानंद
मालवाड़ा में स्थित गुरू जम्भेश्वर मंदिर में चल रही दिव्य जंभसार कथा के छठे दिन कथावाचक स्वामी सच्चिदानंद आचार्य ने कहा कि यज्ञ की भगवान का दूसरा रूप है। प्रतिदिन सुबह ं गाय के घी से यज्ञ में आहुति देने से भगवान प्रसन्न होते है। भगवान जम्भेश्वर ने कलयुग में भगवान का दर्शन ज्योति में बताया था। उसी आधार पर बिश्नोई समुदाय के लोगों के घर में प्रतिदिन शुद्ध गाय के घी से यज्ञ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यज्ञ कि ज्योति से भगवान का दर्शन होगा। साथ ही वातावरण में शुद्धिकरण भी होता है। उन्होंने कहा कि यज्ञ में आहुति देते समय गुरू महाराज के बताये 120 शब्दों का पाठ करना चाहिए। जिससे जीवन का रहस्य पता चल जायेगा। शब्दवाणी का पाठ करने से संस्कारों कि प्राप्ति होती है। इस मौके पर मुकाम पीठाधीश्वर स्वामी रामानंद महाराज, स्वामी कृष्णानंद आचार्य, ऋ षिके श, मालवाड़ा महंत स्वामी सुखदेव मूनि, करावड़ी महंत स्वामी कृपाचार्य सहित संत व समाज के लोग मौजूद रहे।