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बीमा कंपनी के कम खराबा बताने से 60 गांवों के किसानों को नहीं मिल पाया क्लेम

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | जालोर/गुडा बालोतान

वर्ष 2017 के दौरान अधिक बारिश होने से हुए खरीफ फसल खराबे को लेकर फसल बीमा कम्पनी की ओर से फसल बीमा क्लेम राशि जारी की गई है। पूरे जालोर जिले के लिए करीब 53 करोड़ रुपए जारी किए गए है। जिसमें से 25 प्रतिशत के हिसाब से फसल बीमा नियमों के मुताबिक किसानों के खातों में खराबे का सर्वे होने से पहले ही समायोजित कर दिया गया था।

वैसे ग्राम सहकारी समितियों के अलावा राष्ट्रीयकृत बैंकों व ग्रामीण बैंकों से फसली ऋण लेने वाले किसानों के खातों में भी 25 प्रतिशत बीमा क्लेम राशि समायोजित की जा चुकी थी। वर्तमान में करीब 47 करोड़ 90 लाख रुपए का फसल बीमा क्लेम दी जालोर सैन्ट्रल कॉ आपरेटिव बैंक की ओर से जिले की संबंधित ग्राम सहकारी समितियों में ट्रांसफर कर दिया गया है। तथा वर्ष 2017 के दौरान फसल बीमा प्रीमियम राशि ऑनलाइन जमा होने से अब फसल बीमा क्लेम की राशि संबंधित बैंक या सहकारी समिति की ओर से किसानों के खातों में क्लेम राशि भी ऑनलाइन समायोजित की कर दी जाएगी।

वर्ष 2016 के दौरान वंचित रहे किसानों को मिलेगा बीमा क्लेम : इसके अलावा वर्ष 2016 खरीफ फसल खराबे का जिन गांवों के किसानों को क्लेम नहीं मिला था। उन वंचित गांवों के किसानों के लिए वर्तमान में 15 करोड़ 68 लाख रुपए का क्लेम बीमा कम्पनी की ओर से जारी किया गया है।

वर्ष 2016 के दौरान खरीफ फसल खराबे को लेकर फसल बीमा करने वाली बीमा कम्पनी की ओर से पूर्व में 90 करोड़ 87 लाख रुपए जारी किए थे। वर्तमान में वंचित रहे गांवों के लिए 15 करोड़ 68 लाख रुपए की राशि दी जालोर सैन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के माध्यम से संबंधित ग्राम सहकारी समितियों में समायोजित की जा चुकी है। जिसमें से 13 करोड़ 57 लाख रुपए अरणाय, बिजरोला, गुंदाऊ, खारा, डांगरा, चौरा ग्राम सहकारी समिति में ट्रांसफर कर दी गई है। वहीं जालोर शाखा के सामतीपुरा, देबावास, वादनवाडी व सांकरणा के लिए 1 करोड़ 26 लाख रुपए जारी किए गए है। जबकि चितलवाना के लिए ७२ लाख 54 हजार एवं करावडी सांचौर के लिए 74 लाख 54 हजार रुपए जारी किए गए है।

इन गांवोंं को न तो वर्ष 2016 में कोई क्लेम मिला न ही वर्ष 2017 में मिला : वर्ष 2017 के दौरान आहोर तहसील के 61 पटवार सर्कल के कुल 139 गांवो में से केवल 79 गांवों में ही खराबा दर्शाया गया है। जिस पर जिन गांवों में 75 प्रतिशत से शत प्रतिशत तक का खराबा हुआ है। वहीं 139 गांवों में से मात्र 79 गांवों में खराबा दर्शाया गया है और जहां पर 30 प्रतिशत से कम खराबा हुआ है उन गांवों को फसल बीमा क्लेम में शामिल नहीं किया गया है। इसमें गुडा बालोतान, चरली, दयालपुरा, मादडी, गंगावा, अगवरी, उम्मेदपुर, मोरू, मालपुरा, बेदाना नया व पुराना, पावटा, सेदरिया बालोतान, रसियावास खुर्द व कलां, पलासियां खुर्द व कलां, हरियाली, हरजी, चवरछा, बुडतरा, छीपरवाडा, डोडीयाली, आलावा समेत ऐसे कई गांव है जिनमें खराबा होने के बावजूद भी पटवारियों की ओर से खराबे का सही आकलन नहीं करने से इन गांवों के किसानों को ऑफ लाइन सिस्टम से मिलने वाला वर्ष 2016 का फसल बीमा क्लेम आज दिन तक नहीं मिल पाया है। हालांकि वर्ष 2017 के दौरान पावटा, सेदरिया बालोतान, रसियावास खुर्द व कलां, पलासियां खुर्द व कलां, हरियाली, हरजी, पचानवा, आलावा, डोडीयाली गांव को खराबा क्लेम में शामिल जरूर किया गया है, लेकिन चरली से उम्मेदपुर के राजस्व गांवों को शामिल नहीं किया गया है। जबकि हरियाली से नया बेदाना महज एक डेढ़ किमी की दूरी पर ही स्थित है। इनके अलावा जिलेभर के ऐसे कई गांव है जहां पर खराबे के आकलन में त्रुटियां रखने से किसानों को उनके नुकसान की भरपाई नहींं मिल सकी है।

खरीफ फसल खराबे को लेकर फसल बीमा कम्पनी ने 53 कराेड़ की राशि जारी की

रिपोर्ट में सही आकलन नहीं करने से किसानों को नही मिल रहा है उनका हक

किसानों की माने तो एक बार खराबा कम होता है मगर पटवारियों की रिपोर्ट हर बार एक समान ही रहती है। जब एक या दो किलोमीटर की दूरी पर आए हुए गांव में ३८ प्रतिशत खराबा होता है। और उसके पास में सटे हुए गांव में कोई खराबा नहीं होता है। ये हैरान करने वाली बात है। किसानों के बताया कि वर्ष २०१६ से लेकर आज दिन तक इन गांवों के किसानों के साथ दोहरी नीति ही अपनाई जा रही है। तथा राजस्व रिकार्ड में इन गांवों में २५ प्रतिशत से कम का खराबा दर्शाकर किसानों को बीमा क्लेम राशि से वंचित रखा जा रहा है।

भास्कर न्यूज | जालोर/गुडा बालोतान

वर्ष 2017 के दौरान अधिक बारिश होने से हुए खरीफ फसल खराबे को लेकर फसल बीमा कम्पनी की ओर से फसल बीमा क्लेम राशि जारी की गई है। पूरे जालोर जिले के लिए करीब 53 करोड़ रुपए जारी किए गए है। जिसमें से 25 प्रतिशत के हिसाब से फसल बीमा नियमों के मुताबिक किसानों के खातों में खराबे का सर्वे होने से पहले ही समायोजित कर दिया गया था।

वैसे ग्राम सहकारी समितियों के अलावा राष्ट्रीयकृत बैंकों व ग्रामीण बैंकों से फसली ऋण लेने वाले किसानों के खातों में भी 25 प्रतिशत बीमा क्लेम राशि समायोजित की जा चुकी थी। वर्तमान में करीब 47 करोड़ 90 लाख रुपए का फसल बीमा क्लेम दी जालोर सैन्ट्रल कॉ आपरेटिव बैंक की ओर से जिले की संबंधित ग्राम सहकारी समितियों में ट्रांसफर कर दिया गया है। तथा वर्ष 2017 के दौरान फसल बीमा प्रीमियम राशि ऑनलाइन जमा होने से अब फसल बीमा क्लेम की राशि संबंधित बैंक या सहकारी समिति की ओर से किसानों के खातों में क्लेम राशि भी ऑनलाइन समायोजित की कर दी जाएगी।

वर्ष 2016 के दौरान वंचित रहे किसानों को मिलेगा बीमा क्लेम : इसके अलावा वर्ष 2016 खरीफ फसल खराबे का जिन गांवों के किसानों को क्लेम नहीं मिला था। उन वंचित गांवों के किसानों के लिए वर्तमान में 15 करोड़ 68 लाख रुपए का क्लेम बीमा कम्पनी की ओर से जारी किया गया है।

वर्ष 2016 के दौरान खरीफ फसल खराबे को लेकर फसल बीमा करने वाली बीमा कम्पनी की ओर से पूर्व में 90 करोड़ 87 लाख रुपए जारी किए थे। वर्तमान में वंचित रहे गांवों के लिए 15 करोड़ 68 लाख रुपए की राशि दी जालोर सैन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के माध्यम से संबंधित ग्राम सहकारी समितियों में समायोजित की जा चुकी है। जिसमें से 13 करोड़ 57 लाख रुपए अरणाय, बिजरोला, गुंदाऊ, खारा, डांगरा, चौरा ग्राम सहकारी समिति में ट्रांसफर कर दी गई है। वहीं जालोर शाखा के सामतीपुरा, देबावास, वादनवाडी व सांकरणा के लिए 1 करोड़ 26 लाख रुपए जारी किए गए है। जबकि चितलवाना के लिए ७२ लाख 54 हजार एवं करावडी सांचौर के लिए 74 लाख 54 हजार रुपए जारी किए गए है।

इन गांवोंं को न तो वर्ष 2016 में कोई क्लेम मिला न ही वर्ष 2017 में मिला : वर्ष 2017 के दौरान आहोर तहसील के 61 पटवार सर्कल के कुल 139 गांवो में से केवल 79 गांवों में ही खराबा दर्शाया गया है। जिस पर जिन गांवों में 75 प्रतिशत से शत प्रतिशत तक का खराबा हुआ है। वहीं 139 गांवों में से मात्र 79 गांवों में खराबा दर्शाया गया है और जहां पर 30 प्रतिशत से कम खराबा हुआ है उन गांवों को फसल बीमा क्लेम में शामिल नहीं किया गया है। इसमें गुडा बालोतान, चरली, दयालपुरा, मादडी, गंगावा, अगवरी, उम्मेदपुर, मोरू, मालपुरा, बेदाना नया व पुराना, पावटा, सेदरिया बालोतान, रसियावास खुर्द व कलां, पलासियां खुर्द व कलां, हरियाली, हरजी, चवरछा, बुडतरा, छीपरवाडा, डोडीयाली, आलावा समेत ऐसे कई गांव है जिनमें खराबा होने के बावजूद भी पटवारियों की ओर से खराबे का सही आकलन नहीं करने से इन गांवों के किसानों को ऑफ लाइन सिस्टम से मिलने वाला वर्ष 2016 का फसल बीमा क्लेम आज दिन तक नहीं मिल पाया है। हालांकि वर्ष 2017 के दौरान पावटा, सेदरिया बालोतान, रसियावास खुर्द व कलां, पलासियां खुर्द व कलां, हरियाली, हरजी, पचानवा, आलावा, डोडीयाली गांव को खराबा क्लेम में शामिल जरूर किया गया है, लेकिन चरली से उम्मेदपुर के राजस्व गांवों को शामिल नहीं किया गया है। जबकि हरियाली से नया बेदाना महज एक डेढ़ किमी की दूरी पर ही स्थित है। इनके अलावा जिलेभर के ऐसे कई गांव है जहां पर खराबे के आकलन में त्रुटियां रखने से किसानों को उनके नुकसान की भरपाई नहींं मिल सकी है।

इनका कहना

पावटा गांव समेत आस पास के गांवों में वर्ष २०१६ के दौरान करीब ८० प्रतिशत से भी अधिक का खराबा हुआ था। लेकिन बीमा कम्पनी की ओर से आज दिन तक क्लेम राशि जारी नहीं की जा रही है। किसानों के हित के लिए संघर्ष करना पड़े तो हम सब किसान मिलकर करेंगे। मगर खराबा होने के बावजूद भी बीमा क्लेम नहीं मिल रहा है तो बीमा कम्पनी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करेंगे। - हंसराज शर्मा, ग्राम सहकारी समिति अध्यक्ष पावटा

दी सैन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक शाखा की ओर से वर्ष २०१६ के दौरान वंचित रहे गांवों के किसानों के लिए वर्तमान में १५ करोड़ ६८ लाख रुपए एवं वर्ष २०१७ के दौरान फसल खराबे के लिए करीब ४७ करोड़ ९० लाख रुपए की राशि संबंधित सहकारी समितियों के खातों में समायोजित करवा दी गई है। इसमें वर्ष २०१७ के लिए जारी हुए क्लेम राशि में से ५ करोड़ ९६ लाख रुपए २५ प्रतिशत के हिसाब से पूर्व में ही समायोजित करवा दी गई थी। - बी आर पुंसल, सहायक प्रबन्धक ऋण शाखा, दी जालोर सैन्ट्रल को- ऑपरेटिव बैंक, जालोर

गुड़ा बालोतान समेत आसपास के गांवों के किसानों को पिछले दो वर्षों से पटवारियों द्वारा गलत तरीके से खराबे का आकलन करने से फसल बीमा क्लेम राशि नहीं मिल पाई है। बीमा कम्पनी भी यही चाहती है कि किसानों को कम से कम क्लेम जारी किया जाए ताकि कम्पनी को फायदा हो सके। जिसमें पटवारी सकारात्मक रूप से बीमा कम्पनी का सहयोग कर किसानों के साथ दोहरी नीति अपनाकर ये साबित कर रहे है। - मगाराम चौधरी, प्रदेश उपाध्यक्ष भारतीय किसान संघ राजस्थान

मैंने अभी अभी आहोर में ज्वाइन किया है। वर्ष २०१६ या २०१६ के दौरान आहोर तहसील के कितने गांवों में कितना नुकसान हुआ है इसके बारे में पूरी जानकारी नहीं है। मैं सारी बात देखकर ही बता सकता हूॅ कि कौनसे गांव में कितना नुकसान हुआ और कौनसे गांव की सही या गलत रिपोर्ट भेजी गई है। इसके बारे में पता करवाकर ही बता सकता हूं। -हरिसिंह चारण, तहसीलदार आहोर

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