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गुरुद्वारा श्री नानकियाणा साहिब में मेला आज, श्रद्धालु लगाएंगे सरोवर में डुबकी
बैसाखी का पर्व शनिवार को पूरे जिले में बड़ी श्रद्धा व उत्साह से मनाया जा रहा है। ऐसे में जहां जिले के गुरु घरों को सुंदर ढंग से सजाया गया है वहीं श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए जरूरी प्रबंध भी किए गए हैं। शुक्रवार को पर्व की तैयारियों को पूरा कर लिया गया है।
संभावना जताई जा रही है कि राज्य के विभिन्न कोनों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु सरोवर में डुबकी लगा गुरु को नमन करेंगे। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मैनेजर गुरप्रीत सिंह ने बताया कि गुरुद्वारा कमेटी की ओर से प्रत्येक वर्ष बैसाखी का पर्व बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दौरान भारी जोड़ मेला भी लगता है व यहां पर अमृत संचार होता है। कमेटी की ओर से श्री अखंड पाठ साहिब के भोग आज सुबह साढ़े 9 बजे भोग डाले जाएंगे। सिखों के पहले गुरु श्री गुरु नानक देव व मीरी पीरी के मालिक 6वें गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब की याद के साथ जुड़ा हुआ है।
गुरुद्वारा साहिब में दर्ज इतिहास के अनुसार पूर्व देश की ओर जाते समय पहली पातशाही श्री गुरु नानक देव 1497 में 15 दिनों के लिए यहां पर बिराजमान हुए थे। उस समय यहां पर एक छोटा सा गांव था। क्षेत्र के लोगों ने गुरु के दर्शन कर अमृतवाणी सुनकर अपना जीवन सफल किया था। इस स्थान पर श्री गुरु जी का कलयुग के साथ साक्षात्कार भी हुआ था। गुरु जी ने कलयुग को पवित्र बाणी व उपदेश से सही मार्ग दिखाया था। इसके अतिरिक्त इस स्थान पर 1616 में श्री गुरु हरगोबिंद साहिब ने भी अपने चरण डाले थे।
उन्होंने श्री गुरु नानक देव के बैठने वाले स्थान मंजी साहिब को बतौर यादगार कायम किया व लोगों को धर्म का उपदेश देकर इस स्थान की पवित्रता को उजागर किया। यहां उन्होंने एक करीर के वृक्ष के साथ अपना घोड़ा बांधा था। गुरुद्वारा साहिब के निर्माण के दौरान अंजान लोगों ने इस वृक्ष को काट दिया था लेकिन कुछ समय बाद करिश्माई ढंग से करीर का वृक्ष दीवारों को तोड़ता हुआ दोबारा प्रगट हो गया था। वह करीर साहिब आज भी मौजूद है।
गुरुद्वारा श्री नानकियाणा साहिब में पहुंचे श्रद्धालु सरोवर में डुबकी लगाते हुए।